हिंदू-मुस्लिमों के बीच प्रेम देखना है तो मथुरा आइये। चाहे अकबर खान हो या फिर साफिया, मुनव्वर या वजीर खान, अकबर हों या इरशाद। यह लोग अधिकमास में दूरदराज से आए कृष्ण भक्तों को गोवर्धन की परिक्रमा लगवा रहे हैं।
कोई आटो रिक्शा से परिक्रमा लगवाता है तो कोई रिक्शा से। खास बात यह है कि परिक्रमा मार्ग के हर पड़ाव की कहानी इन्हें जुबानी याद है। इस बार अधिकमास और रमजान एक दिन के आगे पीछे शुरू हुए हैं।
अधिकमास 16 से शुरू हुआ है तो रमजान 17 से। अधिकमास में मथुरा, गोवर्धन और वृंदावन की परिक्रमा लगाने के लिए हजारों भक्त पहुंच रहे हैं। पुरुषोत्तम मास में ब्रज 84 कोस की परिक्रमा भी चल रही है।
चौबीस घंटे परिक्रमा मार्ग पर राधे-राधे गूंज रहा है। वहीं रमजान में मुस्लिम भी दूर दराज से आने वाले कृष्ण भक्तों की मदद कर रहे हैं।
अकबर खान का कहना है कि वह वैसे तो अपने रिक्शा से दुकानों पर माल की सप्लाई करते हैं लेकिन अधिकमास में परिक्रमार्थियों की भीड़ बढ़ जाती है तो और तमाम लोगों को रिक्शा नहीं मिल पाता।
लिहाजा वह अपने रिक्शा पर बैठाकर 21 कोस की परिक्रमा करवाते हैं। अकबर का कहना है कि परिक्रमार्थी जो प्यार से दे देता है वह रख लेते हैं। साफिया खान का कहना है कि वह रोजे से हैं।
हिंदू-मुस्लिम क्या होता है
दोपहर में तो मुश्किल होगा लेकिन सुबह और शाम को वह अपनी आटो रिक्शा से लोगों को परिक्रमा लगवा देते हैं। नीमगांव निवासी वजीर खान का कहना है कि हिंदू-मुस्लिम क्या होता है साहब।
हम तो केवल इंसान हैं। परिक्रमा मार्ग से ही हमारा परिवार पल रहा है। मुनव्वर खान ने बताया कि वह परिक्रमार्थियों को पानी के पाउच भी बांट देते हैं। वह जब अपनी आटो में बीस से तीस पाउच लेकर चल रहे हैं।
अकबर खान का कहना है कि लोग बड़ी दूर से आते हैं। कई बार ऐसा भी होता है जब लोगों के पास पैसे नहीं होते। वह परिक्रमा लगवाने के उनसे पैसे नहीं लेते हैं।