आगरा फोर्ट डिपो में हाजिरी की गड़बड़ी की जांच कर रही कमेटी
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आगरा फोर्ट डिपो में चालक, परिचालकों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन भत्ते के नाम पर ‘खेल’ किया गया। रोडवेज अफसरों की मिलीभगत से ऐसे चालक, परिचालकों को भी भत्ते का भुगतान कर दिया गया जो ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। घोटाले में रोडवेज के कई कर्मचारी फंस सकते हैं। मामले का खुलासा होने पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी घोटाले की जांच करके अपनी रिपोर्ट तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करेगी।
त्योहारों पर रोडवेज बसों के फेरे बढ़ाए जाते हैं। इसके लिए परिवहन निगम संविदा के चालक और परिचालकों को 22 दिन की ड्यूटी और पांच हजार किलोमीटर की दूरी तय करने वालों को तीन हजार रुपये का प्रोत्साहन भत्ता (इंसेटिव) देता है। सूत्रों की मानें तो आगरा फोर्ट डिपो के कर्मचारियों ने अप्रैल 2016 से फरवरी 2017 तक चालक, परिचालकों को प्रोत्साहन भत्ता देने के नाम पर खेल किया। ऐसे कर्मचारियों को भी भत्ते का भुगतान कर दिया गया, जोकि ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। उनकी उपस्थिति दर्ज कर दी गई। ऐसे कंडक्टरों को भी लाभ दे दिया गया, जिन्होंने पांच हजार किलोमीटर के स्थान पर कम दूरी तय की थी, लेकिन कागजात में उनके किलोमीटर बढ़ा दिए। इस तरह तकरीबन 10 से 12 लाख रुपये का हेरफेर हुआ है। पिछले दिनों इस मामले की शिकायत रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक के पास पहुंची। उन्होंने जांच के लिए एआरएम मोहनलाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी को जांच के निर्देश दिए। कमेटी को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इस मामले में फोर्ट डिपो के अफसर, समय व्यवस्थापक समेत कई कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है। इस संबंध में आरएम पार्थसारथी मिश्रा का कहना है कि उपस्थिति की जांच कराई जा रही है, कोई घोटाला नहीं है।
घोटाले पर पड़ सकता है परदा
आगरा। प्रोत्साहन भत्ते में हुए गोलमाल की जांच में कई ऐसे अधिकारियों को दी गई है, जिनकी संलिप्तता इस मामले में हो सकती है। इस तरह से जांच को प्रभावित करने का काम किया गया है। ऐसे में घोटाले पर परदा पड़ सकता है। रोडवेज के कर्मचारी नेताओं की मानें तो इस मामले में कई बड़े भी फंस सकते हैं।