स्क्रीनिंग के बाद श्रमिकों को भेजा गया
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आगरा आईएसबीटी (अंतरराज्यीय बस अड्डे) पर हरियाणा और पंजाब से पैदल चलकर आ रहे प्रवासी श्रमिकों के आगरा पहुंचने का सिलसिला बंद नहीं हुआ है। दो दिन बाद घर जाने के लिए बस मिली तो प्रवासी श्रमिकों के आंसू छलक आए। गुरुवार को भी डेढ़ हजार श्रमिकों को 50 बसों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजा गया। इस दौरान खाने के पैकेट भी बंटवाए गए।
प्रवासी मजदूरों का पलायन अभी थमा नहीं है। दो दिन तक रोडवेज की बसें सीमित संख्या में चलीं, इस कारण मजदूरों ने बस अड्डे के नजदीक ही पेड़ों के नीचे डेरा डाल दिया। कुछ श्रमिक परिवार तीन दिन से यहां जमे हुए थे। गुरुवार को भी हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान के 500 से ज्यादा श्रमिक आईएसबीटी पर पहुंच गए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी भी आईएसबीटी पहुंचे। यहां 50 बसों को शाम तक रवाना किया गया।
इन बसों में गोरखपुर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, बांदा, बस्ती, इलाहाबाद, वाराणसी आदि जिलों के श्रमिकों को भेजा गया। इसके पहले श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई और उन्हें भोजन के पैकेट भी वितरित किए गए। आईएसबीटी पर सेवा प्रबंधक एसपी सिंह ने श्रमिकों को पानी की व्यवस्था करवाई। दो दिन से आईएसबीटी के पास बैठे श्रमिकों के लिए आजमगढ़ को जाने वाली बस मिलीं तो सोमवती की आंखों से आंसू छलक आए। बच्चे भी रोने लगे।