आगरा शहर और देहात में 24 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें 17 ब्लैक स्पॉट नेशनल हाईवे (एनएच-2) के हैं। इन पर हर समय जान का खतरा रहता है। इसके बावजूद रोड इंजीनियरिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस वजह से हादसे हो रहे हैं। एत्मादपुर से लेकर रुनकता क्षेत्र तक कई बार हादसों में लोगों की जान जा चुकी है।
ट्रांसपोर्ट नगर कट के सामने तीन साल पहले 24 घंटे में दो भीषण हादसों में 12 लोगों की जान चली गई थी। पांच मार्च 2017 को ट्रांसपोर्ट नगर के सामने सिकंदरा की ओर से आती इनोवा कार डिवाइडर को तोड़कर सड़क के दूसरी ओर चली गई थी। उसने सामने से आती कार में टक्कर मार दी थी। हादसे में कार सवार चार लोगों समेत पांच की मौत हो गई थी।
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अगले दिन कोरियर कंपनी का कंटनेर डग्गेमार बस को बचाने की कोशिश में अनियंत्रित हो गया था। सड़क किनारे खड़े पांच ऑटो को टक्कर मार दी थी, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी।
इन हादसों के बाद हाईवे पर ऑटो का आवागमन प्रतिबंधित किया गया था। रोड इंजीनियरिंग में बदलाव की बात हुई थी। मगर, अब तक कोई बदलाव नहीं हो सका। ऑटो चल रहे हैं। हाईवे पर कई जगह डिवाइडर टूटा हुआ है। रात में कई स्थानों पर अंधेरा होता है। इससे हादसे होते हैं।
हाईव के ब्लैक स्पॉट
हीरालाल की प्याऊ, शेरजंग दरगाह कट, रेलवे पुल के नीचे, गुरु का ताल गुरुद्वारा मोड़, तेज शू फैक्टरी कट, अरसेना कट, अरतौनी कट, सिकंदरा तिराहा, रुनकता तिराहा, ट्रांसपोर्ट नगर, लायर्स कॉलोनी, वॉटरवर्क्स, ट्रांसयमुना में गोयल अस्पताल कट, मंडी समिति, झरना नाला, कुबेरपुर कट और अबुल उलाह दरगाह हैं।
गुरुद्वारा कट पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
गुरुद्वारा के कट पर हादसे की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी लोगों की जान जा चुकी है। एक साल पहले एक स्कूटर सवार की मौत हुई थी। दो साल पहले बच्चों को किताब दिलाकर ला रहे पिता की मौत हो गई थी। चार साल पहले दवा व्यवसायी की हादसे में मौत हुई थी। इसके अलावा भी कई हादसे हो चुके हैं।
डेढ़ साल में 820 लोगों की मौत
जिले में एक जनवरी 2019 से 15 जून 2020 तक 1476 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 820 लोगों (107 महिलाएं और 713 पुरुष) की जान गई।