आगरा में एनएच-2 पर नवनिर्मित सुल्तानगंज फ्लाईओवर पर किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। कार्यदायी संस्था ने फ्लाईओवर की रामबाग से मथुरा जाने वाली लेन पर बड़े होल खोलकर छोड़ दिए हैं।
छह माह तक तो इन्हें पत्थरों से ढककर रखा गया, ताकि निरीक्षण में खामी सामने नहीं आ सके। अब पत्थर हटने के बाद यह होल हादसों को न्योता दे रहे हैं।
एनएच-2 पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने खंदारी, सुल्तानगंज की पुलिया और वाटर वर्क्स फ्लाईओवरों का निर्माण करवाया।
सुल्तानगंज फ्लाईओवर पर यातायात को शुरू हुए करीब एक साल होने जा रहा है, लेकिन अभी तक फ्लाईओवर पर काम अधूरे हैं। कुछ माह पहले ही कार्यदायी संस्था रिलायंस इन्फ्रा ने फ्लाईओवर की दोनों ओर नाले का निर्माण करवाया है।
इसके निर्माण के कुछ माह बाद ही साइड की दीवारों में पड़ गई थीं। कई पत्थर चटक गए थे और कई गिरने के कगार पर थे। इसके बाद कार्यदायी संस्था को इन दरारों को भरना पड़ा था।
अब फ्लाईओवर की एक और खामी सामने आई है। फ्लाईओवर पर रामबाग से मथुरा की ओर जाने वाली लेन पर जलनिकासी के लिए बड़े होल बनाए गए थे। इन होल को खुला छोड़ दिया गया है।
हर वक्त मंडरा रहा खतरा
इन पर पहले पत्थर रखकर ढक दिया गया था, ताकि वाहन चालक पुल की रेलिंग के नजदीक बने इन होल से होकर नहीं गुजरें। अब यह पत्थर हट गए हैं। तकरीबन आधा फुट के इन होल से बच्चा भी पुल से नीचे गिर सकता है।
अभी तक पुल पर किसी तरह की प्रकाश व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अंधेर में पुल पर खतरा कई गुना बढ़ चुका है। कई पैदल राहगीर भी इन होल में गिरकर घायल हो चुके हैं।
गाजियाबाद खंड के परियोजना निदेशक मोहम्मद शफी का कहना है कि सुल्तानगंज फ्लाईओवर पर जलनिकासी के होल में जाली लगानी चाहिए। कार्यदायी संस्था से जवाब तलब किया जाएगा।