मैनपुरी। शहर से गुजरने वाली जीवनदायिनी ईशन नदी आज खुद के लिए भगीरथ को तलाश रही है। वर्तमान में शासन और प्रशासन की अनदेखी से नदी का पानी आज दूषित हो चुका है। सीवेज और कूड़े के चलते धीरे-धीरे ये नदी अपना अस्तित्व ही खोती जा रही है।
शहर से होकर गुजरने वाली ईशन नदी गंगा की सहायक नदी है। गंगा की सहायक नदी होने के साथ ही ईशन का अपना पौराणिक महत्व भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार 84 हजार ऋषियों ने ईशन के किनारे ही तपस्या की है। आज भी शहर का सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर हो या फिर च्यवन ऋषि की तपस्थली हो सभी ईशन के तट पर ही हैं। दो दशक पूर्व तक ये नदी किसानों के सिंचाई में अपना अहम योगदान देती थी। एक बड़े भू-भाग को इसी नदी से सिंचाई के लिए पानी मिलता था। लेकिन धीरे-धीरे सफाई के अभाव में नदी का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। नदी के किनारे अवैध निर्माण से पहले नदी संकरी हो गई तो वहीं नालों और शहर से निकलने वाले सीवेज नदी का पानी भी दूषित कर दिया है। हाल यह है कि नदी में अब हर तरफ बस कूड़ा और जलकुंभी ही नजर आ रहीं हैं। कई बार नदी को बचाने को लिए नालों के पानी और सीवेज को रोकने की मांग उठी, लेकिन आज तक इस पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकी। वहीं दूसरी तरफ गंगा को साफ करने की मुहिम भी ईशन की बदहाली के चलते साकार नहीं हो पा रही है।
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2015 में आधी नदी की ही हुई थी सफाई
सात साल पहले 2015 में शासन ने ईशन नदी की सफाई कराने के आदेश दिए। इसके बाद सिंचाई विभाग ने काम शुरू भी कराया। आधी नदी में ही सफाई का काम हो पाया था कि एक विवाद के चलते सफाई का कार्य रुक गया। इसके बाद ये कार्य सात साल बाद भी पूरा नहीं हो सका।
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-नदी में कूड़ा डंप करना पूर्णतया प्रतिबंधित है। नदी की सफाई के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही ईशन नदी को फिर से निर्मल बनाने के लिए काम शुरू होने कीि उम्मीद है।
-नवोदिता शर्मा, एसडीएम सदर।