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राइस मिल बंद होने के कारणों की होगी तलाश

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20एमएनपी-15-कचहरी रोड पर बंद पड़ा राइस मिल - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। धान की बंपर पैदावार के बाद भी जिले में राइस मिलें बंद होती जा रही हैं। कई राइस मिल मालिक मिलों को बंद करके अन्य कारोबार शुरू कर चुके हैं। शासन के निर्देश पर अब मिल बंद होने के कारणों की तलाश की जाएगी।
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जिले में दो दशक पहले जिले में 84 राइस मिलों का संचालन हुआ करता था। सरकारी नीतियों और संबंधितों की उदासीनता के चलते राइस मिलें धीरे धीरे बंद होती गईं। वर्तमान में जिले में केवल नौ साइस मिलों का संचालन हो रहा है। जबकि 75 मिलों में ताले लग चुके हैं। कई राइस मिल मालिकों ने प्लाटिंग करके उनका स्वरूप ही खत्म कर दिया है। जबकि कई मिलों के स्थान पर अब फ्लोर मिल संचालित हो रहे हैं। मिलों का संचालन बंद होने से जिले में बेरोजगारी बढ़ी है। उद्योग शून्य जिले के लोगों को लंबे समय से किसी बड़े उद्योग की दरकार है। शासन के उप सचिव एके वर्मा ने बंद राइस मिलों के कारणों की जानकारी प्रशासन से मांगी है। एक बार फिर अब धान उत्पादकों को उम्मीद जगी है कि उनकी धान की पैदावार की जिले में ही खपत शुरू होगी।
इसलिए बंद हुई राइस मिलें
सरकार ने लेवी लेना बंद कर दिया।
राइस मिलों का नहीं हुआ आधुनिकीकरण।
मशीनों से गीले धान की कटाई का बढ़ा चलन।
राइस मिल मालिक नहीं लेते धान
दो दशक पहले राइस मिल मालिक किसानों का सीधे धान खरीद लेते थे। इससे धान उत्पादक किसान को लाभ होता था। राइस मिलें बंद होने के बाद अब किसान मंडी में ही आढ़तियों को धान की फसल बेचते हैं। इससे उनको धान की पैदावार का उचित लाभ नहीं मिल पाता है।
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धान की पैदावार तो अच्छी होती है, लेकिन उसका लाभ नहीं मिल पाता है। मंडी में आढ़तिया को धान बेचना किसान की मजबूरी होती है। किसान को फसल का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता है।
रोमी यादव, लालपुर सथिनी
सरकार को चाहिए जिले में बंद हो रही राइस मिलों को एक बार फिर चालू कराया जाए। जिले में धान आधारित उद्योग लगवाया जाए। इससे किसानों की धान की उपज की खपत जिले में ही हो सके।
विवेक कुमार, शाहआलमपुर
एक समय था जब राइस मिलों से जिले की पहचान थी। धान की खपत राइस मिलों में हो जाती थी। किसानों को मिलों में धान खपाने से फायदा होता था। अब तो आढ़तिया ही धान खरीदते हैं।
रामसेवक, घमुर्रा
अगर जिले में बंद राइस मिलें चालू कराई जाएं या धान आधारित उद्योग लगवाए जाएं तो जिले की बेरोजगारी काफी हद तक दूर हो जाएगी। किसानों के लाभ के लिए सरकार को योजना बनानी ही चाहिए।
बॉबी यादव, उद्दैतपुर
घाटे में नहीं हो सकता व्यापार
धान की बंपर पैदावार के बीच सरकार ने कभी राइस मिलों की ओर ध्यान नहीं दिया है। राइस मिलों के लिए सरकार ने कोई कार्य योजना नहीं बनाई है। जन प्रतिनिधियों ने भी पहल नहीं की है। घाटे में व्यापार करना संभव नहीं है।
सुनील अग्रवाल, राइस मिल संचालक
सरकार की नीतियों से बढ़ी बेरोजगारी
जिले में बेरोजगारी बढ़ने की वजह सरकार की नीतियां हैं। जिले की उद्योग शून्यता समाप्त करने के लिए किसी सरकार ने कोई पहले नहीं की है। प्रदेश और देश की राजनीति में जिले के दखल के बाद भी उद्योग नहीं लग सके हैं।
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सीताराम तापड़िया, पूर्व महामंत्री, उप्र राइस मिलर्स एसोसिएशन
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