आगरा की तहसील सदर में बैनामों में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद एसआईटी मामले की जांच कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि जिन बैनामों के पन्ने फाड़े गए। उनके स्थान पर फर्जी तरीके से कागजात बना लिए गए। अब जमीन के असली वारिसान को न्याय कैसे मिल पाएगा। सवाल यह भी है कि यह घोटाला केवल सदर तहसील तक ही सीमित है या भूमाफिया ने अन्य तहसीलों के राजस्व रिकार्ड में सेंध भी लगाई है। इसके लिए भी प्रशासनिक अफसरों को जांच करानी होगी।
तहसील सदर में जमीनों को फर्जी तरीके से बेचे जाने के मामलों में तीन एफआईआर दर्ज कराई गई है। इनमें तहसील के गिरोह ने बैनामों के रिकॉर्ड से छेड़खानी करके जमीनों को दूसरे लोगों को बिकवाने का काम किया था। सवाल है कि अब असली वारिसान को न्याय कैसे मिलेगा। अब मामले में जांच एसआईटी के हाथ में है। ऐसे में असली वारिसान दावा कहां पर करेंगे। इसे लेकर ऊहापोह की स्थिति है।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सक्सेना का कहना है कि सदर तहसील के अलावा जिले की सभी तहसीलों के राजस्व रिकॉर्ड को चेक किया जाना चाहिए। इस संबंध में जिला प्रशासन को कदम उठाना होगा। वहीं तहसील सदर में बोदला प्रकरण सहित अन्य मामलों में भी एसआईटी से जांच कराए जाने की जरूरत है।
गिरोह के सरपरस्त पकड़ से दूर
तहसील कांड में पुलिस कई गिरफ्तारियां कर चुकी है। लेकिन इन भूमाफिया को संरक्षण देने वाले नेताओं तक पुलिस की जांच नहीं पहुंची है। तहसील के सूत्रों का कहना है कि इस गिरोह के संपर्क में कई नेता भी रहे हैं। अगर आरोपियों की कॉल डिटेल की जांच करवाई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।