गिरफ्तार रिटायर्ड डिप्टी एसपी और दूसरा आरोपी
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राजस्थान के दौसा स्थित मेंहदीपुर बालाजी धाम के महंत के सेवक को ब्लैकमेल करने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी और राजस्थान के एक युवक को रकाबगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी अपना यूट्यूब चैनल चला रहा था। वह राजस्थान के युवक के साथ मिलकर महंत के सेवक से वसूली की कोशिश कर रहा था। आरोपियों ने सेवक को आगरा के जेपी होटल में बुलाया था। पुलिस ने यह कार्रवाई गुपचुप तरीके से की। इस पूरे मामले की जानकारी मीडिया से साझा नहीं की गई। जयपुर के रहने वाले अनुज कुमार महंत नरेशपुरी के सेवक हैं। उन्हें धौलपुर के कसाैटी खेड़ा के जितेंद्र ने कॉल किया था। ट्रू कॉलर पर उसका नाम आरिफ आ रहा था।
अनुज ने पुलिस को बताया था कि जितेंद्र ने अपने पास महंत के निजी वीडियो होने के बारे में बताया। इसके बाद ब्लैकमेल करने लगा। महंत से मिलने की कह रहा था। वीडियो सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में प्रकाशित कराने की धमकी दे रहा था। 26 मई को जेपी होटल में बुलाया। पांच लाख रुपये की मांग की। इतनी बड़ी रकम देने से मना करने पर आरोपी चले गए।
कुछ देर बाद फिर से फोन कर शाहजहां गार्डन के पास बुलाकर जितेंद्र के साथ तीन लोग आ गए। एक ने अपना नाम गणेश बाग, न्यू आगरा निवासी विवेक शर्मा बताया। सीने पर राइफल तानकर एक लाख रुपये छीन लिए। बाकी रकम नहीं देने पर बदनाम करने की धमकी दी। मामले में थाना रकाबगंज में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
फर्जी आईडी से लिए थे सिम
पुलिस ने बताया कि मामले में टीम ने काफी छानबीन की। अनुज कुमार को जिन नंबरों से कॉल किए गए थे, उनकी जानकारी जुटाई गई। यह सब फर्जी आईडी से लिए गए थे। जेपी होटल के सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों के चेहरे साफ हो गए। 1 जून को विवेक शर्मा और राजस्थान निवासी जितेंद्र को गिरफ्तार किया गया। विवेक शर्मा सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी है। उसके पास लाइसेंसी राइफल भी बरामद हुई। पुलिस ने उसे जब्त किया। इसी से महंत के सेवक को धमकाया गया था। आर्म्स एक्ट की धारा भी बढ़ाई गई। उसने अपना यू ट्यूब चैनल शुरू किया था। जितेंद्र को अपने साथ काम पर रखा था। दोनों मिलकर महंत के सेवक को ब्लैकमेल कर रहे थे।
कार्रवाई की किसी को खबर नहीं
मुख्य आरोपी विवेक शर्मा रिटायर्ड सीओ है। वह थाना लोहामंडी, एत्मादपुर में एसएसआई के पद पर तैनात रह चका है। बाद में इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति हो गई। इस पर कानपुर और अलीगढ़ ट्रांसफर हो गया। रिटायरमेंट से पहले सीओ बना। उसे पकड़ना आसान नहीं था। मगर महंत के मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए कहा जा रहा था। यही वजह रही कि पुलिस ने कार्रवाई तो कर दी। मगर मीडिया ब्रीफिंग नहीं हुई।