ममता त्रिपाठी
आगरा। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। इस दिन भारत के प्रथम राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराकर भारत को एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक राष्ट्र घोषित किया। तब से हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है। भारत को अपना संविधान मिल गया। लेकिन क्या आपको पता है कि भारतीय संविधान की मूल प्रति अपने शहर आगरा में भी है। डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में यह दुर्लभ किताबों की श्रेणी में संरक्षित कर रखी गई है।
विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रमुख कर्ताधर्ता प्रोफेसर मोहम्मद अरशद बताते हैं कि 26 नवंबर 1949 को जब भारतीय संविधान बनकर तैयार हुआ, तो इसकी 16 मूल हस्तलिखित प्रतियां बनाई गई थीं, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया। वही सर्वे आफ इंडिया द्वारा संविधान की 1000 प्रतियां प्रकाशित की गई थी।इन्हीं में से एक मूल काॅपी आंबेडकर विश्वविद्यालय (तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय) की शोभा बढ़ा रही है।
यह है खासियत
यूं तो भारतीय संविधान अपने आप में खास है यह दुनिया का सबसे लंबा हस्तलिखित संविधान है। भारत के संविधान को बनाने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन लगे थे।
इंग्लिश में इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने इटैलियन सुलेख शैली में लिखा था जबकि हिंदी में बसंत कृष्ण वैद्य ने इसे हस्तलिखित किया।
संविधान की सभी 16 पाण्डुलिपियों के अंतिम पन्ने पर संविधान सभा के सभी 286 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। इनमें सबसे ऊपर पहला हस्ताक्षर देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का है। इसके अलावा डॉ. बी.आर. आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे महान नेताओं के हस्ताक्षर भी शामिल हैं।
चित्र बनाते हैं प्रत्येक अध्याय को विशेष
संविधान की मूल प्रति में कुल 22 चित्रों को उकेरा गया है जिसके माध्यम से देश की महान परंपरा संस्कृति और इतिहास को बताने की कोशिश की गई है। इन चित्रों को शांति निकेतन कला भवन के प्राध्यापक नंदलाल बोस और राम मनोहर सिन्हा ने नकरीब 4 सालों में बनाया था। इसके आवरण पृष्ठ की शुरुआत अशोक स्तंभ से होती है। अगले भाग में प्रस्तावना लिखी है जिसे सुनहरे बॉर्डर से सजाया गया है। इसके बाद हर अध्याय की शुरुआत में एक विशेष चित्रकार की गई है पहला भाग में जहां मोहनजोदड़ो सील है तो वहीं दूसरे में वैदिक काल में चलने वाले गुरुकुल का दृश्य। मौलिक अधिकारों वाले अध्याय 3 में लंका से रावण पर विजय कर लौटे राम सीता और लक्ष्मण का चित्र बनाया गया है। इसके अलावा अर्जुन को उपदेश देते श्री कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, कुबेर विक्रमादित्य का न्यायालय, नालंदा विश्वविद्यालय, महारानी लक्ष्मीबाई, छत्रपति शिवाजी, टीपू सुल्तान, मुगल शासक अकबर, के साथ ही महात्मा गांधी नेताजी सुभाष चंद्र बोस समेत हिमालय, गंगा जैसी समृद्ध भारतीय विरासत को दर्शाया गया है।