ताजमहल को दूधिया रोशनी से जगमगाने की जिद पर अड़े अफसरों को नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने जोर का झटका दिया है। नीरी ने ताज पर लाइटिंग से नुकसान होने की उसी रिपोर्ट पर मुहर लगाई है, जिसे 12 साल पहले एत्माद्दौला पर लाइटिंग के ट्रायल की जांच के बाद एएसआई की केमिकल ब्रांच ने जारी किया था। एक साल तक ताज पर जांच करने के बाद नीरी की टीम ने फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि इससे ताज के संगमरमर को नुकसान पहुंचेगा।
ताज की कैरिंग केपेसिटी तय करने के लिए नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने सीनियर साइंटिस्ट केवी जार्ज के नेतृत्व में एक साल तक कई पहलुओं को भी जांचा। वायु, जल प्रदूषण के आंकड़े देखने के साथ नीरी ने इसके प्रभाव और बचाव पर भी अपनी रिपोर्ट दी है। इसी रिपोर्ट में ताज पर रात में लाइटिंग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। शाम को ताजमहल बंद होने के बाद पर्यटकों को अंधेरे में निकाला जाता है। उस दौरान कुछ लाइटें जलाने का सवाल एएसआई ने उठाया था। इस पर नीरी ने एलईडी की मूविंग और पाथवे लाइटों की संस्तुति की है, जिन्हें ताज में जरूरत वाली जगहों पर शिफ्ट किया जा सके। केमिकल ब्रांच की उसी रिपोर्ट पर नीरी ने मुहर लगाई है, जिसे एत्माद्दौला पर लाइटिंग के ट्रायल केबाद जारी किया गया।
12 साल पहले एत्माद्दौला को हुआ था नुकसान
‘अब कभी किसी स्मारक पर रात में लाइट डालने की अनुमति न दी जाए और ना ही इसे बढ़ावा दिया जाए’ यह अंश हैं एएसआई रसायन शाखा के तत्कालीन डिप्टी सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलोजिस्ट एन के समाधिया के, जिन्होंने एत्माद्दौला पर साल 2004 में ताज वर्ष के दौरान डाली गई लाइट से स्मारक पर प्रभाव की जांच की थी। उन्होंने रिपोर्ट में लिखा था कि मान्यूमेंट का पर्यावरण बदलने से जोड़ने वाला मोर्टार, मसाला, संगमरमर आदि को नुकसान होता है। डस्ट जमा होने और मान्यूमेंट की सरफेस खुरदुरी पाई गई।
काले धब्बे पड़े स्मारक पर
एत्माद्दौला पर की गई लाइटिंग से कीड़ों के लार्वा, मृत शरीर से मार्बल पर गहरे धब्बे पड़ गए थे। सल्फर आक्सीडाइजिंग बैक्टीरिया, फंगाई, एल्गी और लाइकेन को बढ़ावा मिला और उस एसिड से पत्थर गलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। एत्माद्दौला में सल्फेशन रेट 16 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। अधिक आर्द्रता और एसिड मिस्ट से मार्बल को नुकसान पहुंचा था, इसीलिए भविष्य में एत्माद्दौला समेत संगमरमरी स्मारकों पर लाइटिंग न करने की संस्तुति की गई थी।
ताज पर लाइटिंग के विरोध में एएसआई
ताजमहल पर लाइटिंग के विरोध में एएसआई केमिकल ब्रांच कई बार मुख्यालय को रिपोर्ट दे चुकी है। केमिकल ब्रांच को तो सीआईएसएफ द्वारा यमुना किनारे सुरक्षा के नाम पर लगाई गई हैलोजन लाइटों पर भी आपत्ति है। इनकी रोशनी ताज के चमेली फर्श से ऊपर वाले प्लेटफार्म और गुंबद तक पहुंचती है, जिससे उस पर खास मौसम में कीड़े पहुंचने लगते हैं। केमिकल ब्रांच के मुताबिक रात में लाइट से कीड़े संगमरमर से चिपककर स्राव करते हैं, जो संगमरमर के लिए नुकसानदेह है।