25एमएनपी-20-गणतंत्र दिवस को लेकर शहर में एक दुकान से तिरंगा खरीदते लोग
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मैनपुरी। समय के साथ गणतंत्र दिवस का उत्साह कम होता जा रहा है। देशप्रेम की भावना दिनोंदिन खत्म होती जा रही है। विशेष अवसरों पर ही आजादी के दीवानों को याद किया जाता है। पहले गणतंत्र पर जो उत्साह लोगों में था वह अब गायब हो चुका है। यह कहना है पहले गणतंत्र दिवस पर आजादी के बाद का माहौल देख चुके बुजुर्गों का।
करहल रोड निवासी अरुण कुमार जैन बताते हैं 26 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस पर जिले में जश्न का माहौल था। लोगों ने अपने घरों और दुकानों पर दीपक जलाकर जश्न मनाया था। चौराहों पर एकत्रित होकर देशप्रेम के नारे लगाए थे। अपनी दुकानों और मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर खुशी जताई थी।
वंशीगोहरा निवासी मुंशीलाल शाक्य कहते हैं कि आजादी आंदोलन के दौरान देश में जो माहौल बना था, वह देश के आजाद और गणतंत्र होने पर चौगुना हो गया था। शहर का संता बसंता चौराहा आज भी खुशी के माहौल का गवाह है। चौराहे केे आसपास के मकान और दुकानों की सजावट करके लोगों ने जश्न मनाया था।
करहल निवासी फुंदन खलीफा बताते हैं अब पहले जैसा माहौल नहीं है। लोगों की सोच में बदलाव आ गया है। आज की युवा पीढ़ी आजादी का इतिहास भूल चुकी है। जिले में पहला स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस कैसे मनाया गया, इसकी युवा पीढ़ी को जानकारी ही नहीं है। अब राष्ट्रीय पर्वों पर केवल रस्म अदायगी होती है। कचहरी रोड निवासी कौशलेंद्र मिश्रा कहते हैं आजादी के दीवानों ने जो सपना देखा था वह पूरा नहीं हो पा रहा है। न तो पहले जैसा उत्साह है और न ही देशप्रेम की पहले जैसी भावना।