प्रदेश के बीस जिलों में सक्रिय राशन माफिया गरीबों का गेहूं और चावल बाजार में बेच दे रहे हैं। कई जिलों में फर्जी कार्ड बनाकर राशन हजम किया गया है। राज्य खाद्य आयोग ने इस संबंध में शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। एसआईटी गठित कर जांच करने की सिफारिश की गई है।
प्रदेश में राशन का कुशासन थम नहीं पा रहा है। तमाम कार्रवाई के बावजूद भी राशन की कालाबाजारी धड़ल्ले के साथ हो रही है। मथुरा में ही राशन के गेहूं और चावल के ट्रक कई दफा पकड़े जा चुके हैं। राशन माफिया ने डीलरों से मिलकर फर्जी कार्ड बनवा लिए हैं जिनके आधार पर राशन लेकर उसे बाजार में बेच दिया जाता है।
राज्य खाद्य आयोग के सदस्य डीसी मिश्रा ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि मथुरा और मैनपुरी के साथ मुरादाबाद मंडल, बरेली, मेरठ, सहारनपुर, कानपुर, लखनऊ और झांसी मंडलों के जिलों में बड़ा गोलमाल हुआ है। आजमगढ़, हरदोई, गोंडा, बहराइच और बदायूं में बड़ी संख्या में राशन की दुकानों से कालाबाजारी की शिकायतें खाद्य आयोग तक पहुंच रही हैं। जांच में कई दुकानें तो ऐसी भी मिली हैं जो महीने में एक दफा ही राशन बांट रहे हैं।
कार्ड को जमा करा लिया जाता है। पूर्वांचल के जनपदों का सबसे बुरा हाल है। सर्वाधिक शिकायतों वाले 20 जिलों में अभियान चलाकर कार्रवाई की सिफारिश शासन से की गई है। प्रमुख सचिव खाद्य और खाद्य आयुक्त को इस संबंध में पत्र भी भेजे गए हैं।
गोदाम से शुरू होता है खेल
मथुरा। दरअसल राशन का खेल गोदाम से ही शुरू हो जाता है। हर बोरे में चार से पांच किलो गेहूं पहले ही कम हो जाता है। जांच में इसका खुलासा भी हो चुका है। राज्य खाद्य आयोग ने आवश्यक वस्तु निगम के गोदामों से राशन उठान की प्रक्रिया की जांच की मांग की है। ताकि व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके।