सीटीवीएस विभाग के डॉ. सुशील सिंघल ने बताया कि मथुरा के राजेंद्र शर्मा (38) स्टॉल लगाते हैं। इनको दो साल से कुछ भी खाने पर पेट में असहनीय दर्द होता। कई निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर भी परेशानी ठीक नहीं हुई। इसमें करीब चार लाख रुपये खर्च हो गए। वह एसएन में 17 फरवरी को दिखाने आए। जांच कराने पर छोटी आंत को जाने वाली नस बंद मिली। ये मरीज हेपेटाइटिस-सी से भी संक्रमित पाए गए। ऐसे में विशेषज्ञों की टीम बनाकर 21 फरवरी को सर्जरी की।
इसमें सीधे पैर को खून पहुंचाने वाली नस से बाईपास बनाते हुए कृत्रिम नस छोटी आंत तक पहुंचाई। इससे रक्तसंचार होने लगा और दर्द से आराम मिलने लगा। चरणबद्ध भोजन देने पर दर्द नहीं हुआ। मरीज ठीक होने पर 13 मार्च को डिस्चार्ज कर दिया। फॉलोअप में दिखाने आए मरीज को कोई परेशानी नहीं मिली। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनने से एडवांस जांच, इलाज और सर्जरी हो रही है। निजी अस्पतालों में इसका खर्च 5-6 लाख रुपये आता। यहां सिर्फ कृत्रिम नस ही खरीदनी पड़ी। ऑपरेशन में डॉ. शिव, शिवांश अग्रवाल, डॉ. अपूर्व मित्तल, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. प्रभा, डॉ. सायमा, डॉ. जैस्लीन आदि रहे।