सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और शुभ कार्यों का श्रीगणेश हो जाता है।
मकर संक्रांति पर इस बार करीब 70 वर्ष के बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, तीर्थ स्थलों की यात्रा, दान और अनुष्ठान का कई गुना पुण्य फल प्राप्त होगा।
मकर संक्रांति पर 70 साल बाद महा संयोग बन रहा है। इस दिन स्नान दान करने वालों को 7 अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होगा।
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर के मुताबिक रविवार को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस वर्ष यह दुर्लभ योग है कि इस दिन पारिजात योग, त्रयोदशी योग, सर्वार्थ सिद्घि योग और रवि योग बनेगा।
भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी
आचार्य हरिकृष्ण पाराशर ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दिन के 1.45 बजे होगा। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी दोपहर 1.13 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।
इसी दिन भगवान शंकर प्रदोष व्रत भी है। ज्येष्ठा नक्षत्र 1.13 बजे तक रहेगा। यह योग सभी राशियों के लिए शुभ फलदायी होगा। उधर कानपुर निवासी आदित्य पांडेय का कहना है कि मकर संक्रांति के दिन ध्रुव योग बन रहा है।
इसी दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र और प्रदोष भी है। ऐसे में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष लाभ होगा। सूर्य के उत्तरायण होते ही धनात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। साथ ही शिशिर ऋतु प्रारंभ हो जाती है।
कैसे करें मकर संक्रांति पर्व पर पूजन
आचार्य हरिगोपाल शास्त्री के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन प्रात:काल उठकर स्नान करें। भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प अर्पित करें। प्रसाद के रूप में भी तिल चखें। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।
मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन तिल, कंबल, लाल कपड़ा, लाल मिठाई आदि का दान कर सकते हैं। चावल, मूंग और काली उड़द की दाल का दान करना चाहिए।
गरीबों को कंबल दान करना चाहिए। खिचड़ी के भंडारे भी आयोजित करने का चलन है। शहर भर के मंदिरों में भंडारों की तैयारी हो रही है। शनिवार देर रात तक मंदिरों को सजाने का क्रम चला।
बटेश्वर तीर्थ में होगा महास्नान
बटेश्वर में स्नान, दान पर्व की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। साधु-संतों और श्रद्धालुओं का शनिवार देर शाम से ही जमावड़ा होना लगा था।
मंदिर महंत जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि महायोग बनने की वजह से यमुना स्नान के लिए श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ रहेगी। इधर रेणुका धाम, कैलाश मंदिर घाट, बल्केश्वर घाट, हाथी घाट और दशहरा घाट पर भी स्नान करने लोग पहुंचेंगे।