चिकित्सकों के लिए ब्रेन ट्यूमर अभी भी अबूझ पहेली है। चिंताजनक बात ये है कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों में 3-4 फीसदी बच्चे-किशोर हैं। न्यूरोसर्जन बताते हैं कि अचानक बच्चा मोटा हो रहा है और सुबह सिर में दर्द रहता है तो इसे नजरअंदाज न करें। उनके दिमाग में कैंसर की गांठ हो सकती है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि एसएन की ओपीडी में हर सप्ताह 5-8 मरीज ब्रेन ट्यूमर के आ रहे हैं। इनमें 20 फीसदी की उम्र 25 से भी कम है। इनमें बच्चे भी हैं, जिनमें मर्ज बढ़ने पर अभिभावक दिखाने आए। एकाएक तेजी से वजन बढ़ने और सुबह सिर दर्द और उल्टी के बाद दर्द में आराम को सामान्य समझते रहे। अधिकांश मरीज गंभीर स्थिति पर ही इलाज कराने आए। ऐसे में कई बार सर्जरी की संभावना भी नहीं बचती है। बीते एक दशक में ब्रेन ट्यूमर के दोगुने मरीज मिल रहे हैं।
वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. आरसी मिश्रा ने बताया कि दिमाग में दो तरह के ट्यूमर मिल रहे हैं। इसमें एक बिना कैंसर की गांठ (बिनाइन) है। ये समय के साथ धीमी गति से बढ़ती है। ये कैंसरकारक नहीं होने के कारण आसपास के हिस्सों को संक्रमित नहीं करती है। दूसरी कैंसरकारक (मेलिग्नेंट), ये गांठ तेजी से बढ़ती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को संक्रमित करती है। ये जानलेवा है। ये बच्चों-किशोरों में भी तेजी से बढ़ रही है। ब्रेन ट्यूमर के 3-4 फीसदी मरीजों की उम्र 15 साल से भी कम है। ब्रेन ट्यूमर की अभी तक कोई वैज्ञानिक वजह नहीं पता चल सकी है। कई बार ये जेनेटिक भी होती है।
केस एक:
यमुनापार के 12 साल के बालक का तीन से चार महीने में तेजी से वजन बढ़ा। सुबह सिर में दर्द रहता और उल्टी होने के बाद आराम मिल जाता। बेहतर खानपान से वजन बढ़ने और मौसम की वजह से उल्टी-सिर दर्द की वजह मानकर परिजन नजरअंदाज करते रहे। परेशानी बढ़ने पर जांच कराई तो ट्यूमर मिला।
केस दो:
फतेहाबाद रोड निवासी 14 साल के किशोर को दौरे पड़ते थे। बात करने में कई बार जीभ लड़खड़ाने लगती। इसे सामान्य मिर्गी का दौरा समझकर परिजन देसी उपचार कराते रहे। सिर दर्द और उल्टी समेत अन्य परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाया। जांच कराने पर ब्रेन ट्यूमर निकला।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
- सिर में सुबह के समय दर्द होना। झुकने और खांसी के समय दर्द होना।
- अचानक मिर्गी के दौरे आना। याददाश्त कमजोर होना। भ्रम की स्थिति।
- आंखों की रोशनी अचानक कम होना। सुनाई कम देना।
- बोलने में तकलीफ होना, बोलते समय जीभ का लड़खड़ाना।
- हाथ-पैरों में कमजोरी, शरीर का एक हिस्सा-चेहरा सुन्न होना।
- चलने-फिरने में कदमों का लड़खड़ाना, चक्कर आना।
- तेज दर्द के बाद उल्टी होना, इसके बाद आराम मिलना।