आगरा में माह-ए-रमजान की दस्तक से बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में इन दिनों खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है। बाजार में महंगाई की तपिश भी महसूस होने लगी है। इफ्तार की शान कहे जाने वाले खजूर और सूखे मेवों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आम आदमी के लिए इफ्तार की थाली सजाना जेब पर भारी पड़ने वाला है।
नई बस्ती स्थित कटरा गाड़ीवान के दुकानदार जावेद ने बताया कि रमजान पर बाजार में खजूर और सूखे मेवों की मांग बढ़ जाती है। आयात शुल्क में बदलाव के चलते कीमतों में पिछले साल की तुलना में काफी उछाल आया है। बाजार में खजूर की कई किस्में मौजूद है। जिनमें खजूर कीमिया गोल्ड जो पिछले साल 400 रुपये था, अब 600 रुपये किलो है।
कलमी और अजवा प्रीमियम किस्मों के दाम पिछले साल 500 रुपये था, अब 800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। मकदूम जो पिछले साल 300 रुपये था अब 450 रुपये प्रति किलो के दाम में मिल रहा है। सिर्फ खजूर ही नहीं, बल्कि सूखे मेवे बादाम, किशमिश, छुआरे, पिस्ता और काजू की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पथवारी के दुकानदार चांद वारसी ने बताया कि रमजान पर अधिकतर मौसमी फलों की कीमत भी बढ़ जाती है। अंगूर 120 रुपये किलो, संतरा 100 रुपये किलो, पपीता 40 रुपये किलो और केले 60 रुपये दर्जन की कीमत में उपलब्ध हैं।
खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है
पाए चौकी के जमील खान ने बताया कि रमजान में खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है। रमजान में इफ्तार की थाली में खजूर और मेवे जरूरी होते है, इसलिए खरीदारी करनी ही पड़ती है, भले ही बजट पर असर क्यों न पड़े। -,