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UP: रामू हथिनी....आखिरी पड़ाव पर लड़ रही जिंदगी की जंग,  72 की उम्र में झेल रही है असहनीय पीड़ा

Wed, 14 May 2025 09:28 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

हथिनी रामू 72 की उम्र में असहनीय पीड़ा झेल रही है। वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम उसके उपचार में जुटी हुई है। इंसानों की हैवानियत का शिकार रामू हथिनी जिंदगी की जंग लड़ रही है।
 
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हथिनी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हथिनी रामू के तलवे फट चुके हैं। जख्म इस कदर हैं कि तलवे में गद्दियां नहीं दिखतीं। नजर आती है तो सिर्फ दरार। नाखून ही नहीं बल्कि तलवे भी पैर से करीब-करीब अलग हो चुके हैं। घावों में संक्रमण के चलते उसके लिए खड़ा होना नामुमकिन है। इंसानों की हैवानियत का शिकार रामू हथिनी जिंदगी की जंग लड़ रही है।
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वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम उसे उदयपुर में ही उपचार दे रही है। रामू हथिनी की उम्र 72 साल है। उदयपुर के आवरी माता मंदिर में अस्थायी रूप से वह रह रही है। हालत गंभीर है। नेक्रोसिस के लक्षण के साथ बड़े घाव हो गए हैं। राजस्थान वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस ने देखभाल में सहायता करने के लिए कदम बढ़ाया है।


 
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पशु चिकित्सकों के अनुसार, हर 36 घंटे में हाइड्रा क्रेन का उपयोग कर उसकी साइड बदली जाती है। प्रतिदिन 40 से 60 लीटर फ्लूइड थेरेपी देकर स्थिर किया जा रहा है। उसे आराम देने के लिए कूलिंग सिस्टम, गद्देदार टेंट बिस्तर और चौबीसों घंटे देखभाल की व्यवस्था की गई है।

 

रामू को 1992 में बिहार के सोनपुर पशु मेले से खरीदे जाने के बाद से सड़कों पर भीख मंगवाई जा रही थी। दशकों तक वह कैद में रही। अप्रैल 2024 में राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने हाई पावर कमेटी को एक विस्तृत रिपोर्ट दी, जिसमें विशेष बचाव केंद्र में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई थी।

 
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वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहते हैं कि पुनर्वास आदेश का तत्काल पालन होता तो रामू यूं जिंदगी की जंग नहीं लड़ रही होती। डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी. ने कहा जल्द ही दूसरे हाथी मोती को अस्पताल नहीं भेजा गया तो उसकी भी हालत रामू जैसी हो जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से हाई पावर कमेटी के निर्देशों को तत्काल लागू करने को कहा है जिससे रामू का हाथी अस्पताल लाकर अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके।
 
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