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राम की लीला में अल्लाह के बंदे का हुआ सम्मान

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अजीतगंज में आयोजित रामलीला में तस्लीम अली को सम्मानित करते थानाध्यक्ष एलाऊ - फोटो : MAINPURI
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अजीतगंज। अब तो बस एक ही तेरा मेरा ईमान हो, एक तरफ गीता हो और एक तरफ कुरान हो। काश ऐसी भी मोहब्बत हो अभी इस देश में, मेरा घर रोजा रखे जब तेरे घर रमजान हो। हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल ये लाइनें सबने खूब पढ़ी और सुनी होंगी, लेकिन वास्तव में इन धार्मिक बंदिशों की बेड़ियों को तोड़ तस्लीम अली दुनिया को एक होने का संदेश दे रहे हैं।
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एक ओर जहां राममंदिर को लेकर दो धर्म आपस में बंटे हुए हैं। तो वहीं गांव अजीतगंज निवासी तस्लीम अली (23) उन्हीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीला में पूरे मनयोग से सेवा कर रहे हैं। न उन्हें किसी नाम की चिंता है और न ही पद की लालसा। बस उद्देश्य है तो इतना कि आयोजन में कहीं कोई कमी न रह जाए।
छोटे से लेकर बड़े काम तक सबके लिए हमेशा सबसे आगे रहने वाले तस्लीम अली पिछले चार सालों से अजीतगंज महोत्सव में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी उम्र भले ही कम है, लेकिन उनकी सोच का हर कोई कायल है। केवल खुद ही नहीं वे दूसरे लोगों को भी रामलीला में सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही नहीं तस्लीम नवरात्र में आयोजित होने वाले नवरात्र महोत्सव में भी बराबर भागीदारी करते हैं।
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तस्लीम अली के लिए एक हैं अल्लाह और राम
रामलीला के लिए तस्लीम अली रंगमंच की पुताई से लेकर सभी कार्य खुद ही करते हैं। कुछ लोग तस्लीम अली को रामलीला के लिए समर्पित देखकर उनसे पूछते हैं कि तुम गैर हिंदू होते हुए भी रामलीला में इतनी मेहनत क्यों करते हो? तो तस्लीम का जवाब होता है कि सभी देवी देवता बराबर हैं। जितनी अल्हा की रहमत होती है उतनी ही भगवान की कृपा। गांव में इतना बड़ा आयोजन होता है इसमें सभी लोगों को आगे आकर जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए।
किया गया सम्मानित
सोमवार की रात रामलीला के रंगमंच पर थानाध्यक्ष एलाऊ जेडी सिंह ने तस्लीम अली को रामलीला में विशेष योगदान करने के लिए सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि तस्लीम ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे लोगों को सीख लेनी चाहिए।
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