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कांशीराम विचारकों पर मायावती समर्थकों का हमला

Mon, 23 Mar 2015 01:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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बहुजन समाज के बीच पहली बार विचाराें की जंग सड़क पर दिखी। ये जंग थी कांशीराम विचारकों और मायावती समर्थकों के बीच। रविवार को देवरी रोड के भीम वाटिका में मंच नीले रंग में रंगा था। पार्क में नीले झंडे, मंच पर कांशीराम और डा. अंबेडकर के फोटो। बाबा साहब और कांशीराम के मिशन की बातें, लेकिन जैसे ही बसपा को मायावती से मुक्त कराने का आह्वान कर आरोप शुरू हुए, हाथों में लाठी-डंडे लेकर दर्जन भर युवक आए और बसपा जिंदाबाद के नारे लगाते हुए मारपीट करने लगे। बहुजन मूवमेंट बचाओ राष्ट्रीय आंदोलन के कार्यकर्ताओं से मारपीट कर युवक भाग गए। ठीक उसी पल मंच के सामने बैठीं दर्जनों महिलाएं भी बसपा और मायावती जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सम्मेलन का बहिष्कार कर चली गईं, लेकिन इस हंगामे के बाद भी कांशीराम की बहन स्वर्णकौर समेत समर्थकों ने शाम तक न केवल अपने एजेंडे को बयां किया, बल्कि बसपा को मायावती से मुक्त कराने का संकल्प भी लिया।
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भाई की तरह शासक बनने नहीं, बनाने आई हूं
मायावती की शैली के विरोधी कांशीराम समर्थकों ने बहुजन मूवमेंट राष्ट्रीय आंदोलन को तीन साल पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में शुरू किया। देवरी रोड स्थित भीम वाटिका में इस मूवमेंट के सम्मेलन में बसपा संस्थापक कांशीराम की छोटी बहन स्वर्ण कौर ने कहा कि कांशीराम के विचारों से बसपा अध्यक्ष भटक चुकी हैं। वह अपने भाई के विचारों को बचाने के लिए निकली हैं। इस उम्र में वह शासक बनने नहीं, बल्कि अपने भाई की तरह दलितों, शोषकों को शासक बनाने के लिए चल रही हैं। स्वर्णकौर ने कांशीराम की मृत्यु के समय परिजनों को उनसे न मिलने देने के लिए मायावती पर न केवल आरोप लगाए, बल्कि उन्हें पूरे भाषण में कई बार कोसा।

मायावती हटाओ, बसपा बचाओ की मुहिम
बहुजन मूवमेंट बचाओ राष्ट्रीय आंदोलन की पूरी कमान कांशीराम के सहयोगियों के हाथ में हैं। पूर्व सांसद और मूवमेंट के संयोजक प्रमोद कुमार कुरील ने कहा कि बसपा को कांशीराम ने स्थापित किया, इसलिए बसपा हमारी पार्टी है। हम कोई नई पार्टी नहीं बनाएंगे। पार्टी अध्यक्ष बनकर मायावती मनमानी और तानाशाही पर उतारू हैं। इसलिए उन्हें हटाना होगा। समाज के लोग जागरूक होंगे तो उन्हें पद से हटना ही होगा। यूं भी उत्तर प्रदेश में पार्टी एक तिहाई सीटों पर आ गई है और लोकसभा में तो जीरो पर पहुंच ही गई है।
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वर्जन
कांशीराम के विचारों की बलि देकर सत्ता की मलाई खा रहे बसपा नेताओं ने दारू और रुपये देकर युवकों को हंगामा करने भेजा था। ये कायराना, मूर्खतापूर्ण हरकत है, लेकिन हम डरेंगे नहीं। बसपा से मायावती को हटाकर कांशीराम के सपनों की पार्टी को पुर्नजीवित करेंगे।
पीके कुरील, संयोजक
बहुजन मूवमेंट बचाओ राष्ट्रीय आंदोलन

बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम का नाम लेकर समाज को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। हम तो अपनी पार्टी के कार्यक्रमों में जुटे हुए हैं। हम पर जो आरोप लगाए हैं, वह गलत हैं।
सुनील कुमार चित्तौड़
विधायक, जोनल कोआर्डिनेटर, बसपा

गूंजे बसपा के नारे...
देवरी रोड, भीम वाटिका में कार्यक्रम तो बहुजन मूवमेंट राष्ट्रीय आंदोलन का था, लेकिन हर वक्ता के बाद नारे बसपा जिंदाबाद के लगने लगते।

बसपा के गढ़ से दी चुनौती
आगरा में बसपा के 6 विधायक और 4 एमएलसी हैं। बहुजन मूवमेंट ने जीरो तक पहुंची बसपा में बदलाव के लिए यह मुहिम आगरा से तेज की। भूप सिंह मेहरा, एसपी गौतम, दिनेश गौतम ने कहा कि बसपा संख्या बल में शून्य के साथ नैतिक, वैचारिक और सांगठनिक रूप से भी पहुंची है। कांशीराम के मिशन से बसपा में नई ऊर्जा भरी जाएगी, लेकिन मायावती के बसपा से हटने के बाद ही असली मिशन पूरा होगा।
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