कासगंज। अयोध्या में कारसेवा पूरी होने के बाद संकीर्तन करते कारसेवक
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कासगंज। श्रीराम जन्मभूमि में मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होने से शहर के कारसेवक रोमांचित हैं। कारसेवक बताते हैं कि कासगंज से बड़ी संख्या में लोगों ने कारसेवा में हिस्सा लिया था। सैकड़ों कारसेवकों को अलीगढ़, मैनपुरी व अन्य जेलों में बंद कर दिया गया। इसके बाद भी तमाम कारसेवक मुसीबतों का सामना करते हुए अयोध्या पहुंचे और 6 दिसबंर को विवादित ढांचे विध्वंस को अपनी आंखों से देखा।
शहर के कारोबारी जयकुमार गुप्ता उर्फ टीटू ने बताया कि वे शहर के हिंदूवादी नेता एवं कारसेवक प्रमोद जाजू, विनोद स्वर्णकार, मुन्नालाल आर्य, चंदन भारद्वाज, अरविंद माहेश्वरी, दुर्गेश माहेश्वरी, मुकेश माहेश्वरी, कपड़ा कारोबारी कौशल साहू, कृष्ण गोपाल अग्रवाल व कुछ और साथियों के साथ टोली में 30 नवंबर 1992 को शहर से निकले। 2 दिसंबर को सभी लोग अयोध्या पहुंच गए और वहीं डेरा जमा लिया।
जयकुमार ने बताया कि फैजाबाद से अयोध्या तक इस कदर कारसेवकों की भीड़ थी कि सड़कों के किनारे जहां तहां कारसेवक डटे हुए थे। किसी को न ठंड की चिंता थी और न ही बारिश की। खुले आसमान के नीचे ही जिसे जहां जगह मिली वो वहां रुक गया था। 6 दिसबंर की शाम को उनकी टोली रामकथाकुंज पर थी। करीब 5 बजते ही तमाम कारसेवक गुंबदों पर चढ़ गए। साढ़े 5 से 6 बजे की बीच पहला गुंबद गिराया।
इसके बाद दोनों अन्य गुंबद रात में गिराए। रात में इस पूरे इलाके को समतल कर दिया। फिर माइक से घोषणा हुई कि सभी लोग सड़कों पर बैठ कर रामकीर्तन करें। कारसेवा पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि उस समय यहां के तत्कालीन विधायक नेतराम सिंह वर्मा भी अपने बेटे और पूर्व एमएलसी सुधाकर वर्मा भी अपनी पत्नी के साथ अयोध्या में थे।
पटियाली के अनुराग वार्ष्णेय कारसेवा के लिए गए थे। उन्हें अलीगढ़ में 28 दिनों तक जेल में रखा गया। शहर के जिन कारसेवकों ने विवादित ढांचे के विध्वंस के क्षण को देखा तो वे भूमि पूजन के क्षण को लेकर काफी रोमांचित हैं।