ब्रज के ठाकुर भाव के भूखे हैं। इसी अटूट विश्वास और भाव के अनुरूप बहनें भी ब्रज के ठाकुर कान्हा को भाई मान रक्षा बंधन के पर्व पर राखियों के साथ पातियां भेज अपने दु:ख बांटकर परिवार में सु:ख शांति और समृद्धि की कामना कर रही हैं। ये राखियां देश ही नहीं विदेशों से भी आ रही हैं। रक्षाबंधन पर हर साल कान्हा के नाम से मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल के मंदिरों में राखियां पहुंच रही हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी के अनुसार हर वर्ष रक्षाबंधन पर ठाकुरजी के लिए सैकड़ों की संख्या में राखियां पहुंचती हैं। ठाकुरजी को भाई मानकर महिलाएं राखियों के साथ अपने दु:खों को लेकर पत्र (पाती) भी भेजती हैं।
पत्रों के माध्यम से बहनें ठाकुरजी को अपने मन की पीढ़ा लिखती हैं। बताया कि जो राखियां और पत्र आते हैं उन्हें ठाकुरजी के श्री चरणों में रख दिया जाता है। द्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी का कहना है कि हर वर्ष सैकड़ों राखियां राजाधिराज के नाम आती हैं, जिसमें महिलाएं अपना दुख ठाकुरजी से प्रकट करती हैं।