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जेल में जन्मे 'कान्हा' को नहीं मिली 'नंद' के घर शरण, भावुक करने वाला है यह मामला

Sat, 24 Aug 2019 01:43 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/अलीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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अलीगढ़ की जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदी के नवजात बेटे को पालने के लिए आगरा के राजकीय शिशु गृह में भेजा गया, लेकिन शिशु गृह ने उसे अपने यहां शरण देने से मना कर दिया। शिशु गृह के अधिकारियों का कहना है कि बालक अनाथ नहीं है, उसकी मां जिंदा है। इस कारण बालक को यहां नहीं रखा जा सकता। 
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जेल में निरुद्ध सात दिन के नवजात की मां पर अपहरण का आरोप है। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उसे बनारस के मानसिक आरोग्यशाला में भेजने की तैयारी हो रही थी, लेकिन बच्चे के वापस लौट आने के चलते इस प्रक्रिया को भी रोक दिया गया है। 

इससे पहले जेल प्रशासन ने आगरा और बनारस स्थित दोनों संस्थानों के प्रमुखों को शुक्रवार को पत्र लिखा था। कृष्ण जन्माष्टमी पर हुए इस घटनाक्रम को लेकर जेल प्रशासन के साथ साथ अन्य बंदियों में भी चर्चा है। 
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28 जुलाई से जेल में निरुद्ध है मां

मूल रूप से बिहार के नालंदा के थाना थरधारी के कस्बा अस्ता खज्जमा के रहने वाले रवि रंजन की पत्नी पुष्पलता को सासनी गेट थाने में दर्ज अपहरण के मुकदमे में जिला कारागार में 28 जुलाई को निरुद्ध किया गया था। 

16 अगस्त को महिला ने जिला अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया। महिला की मानसिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी। प्रसव के बाद उसकी हालत और अधिक बिगड़ गई। वो बात-बात पर चीखने लगती है। कई साथी बंदियों-कैदियों को दांतों से काट भी खा चुकी है, जिसके चलते इस महिला को उपचार के लिए बनारस के मानसिक चिकित्सालय में जाना था। 

महिला बंदी के बच्चे को आगरा की विष्णु कालोनी के शाहगंज स्थित राजकीय शिशु गृह लाया गया, लेकिन यहां की अधीक्षिका ने नियमों के चलते बालक को अपने यहां पर रखने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इसके बाद बच्चे को वापस अलीगढ़ ले आया गया।

उधर, अलीगढ़ की जिला जेल के अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि ऐसा यह पहला मामला आया है। इस संबंध में विधिक राय ली जाएगी। साथ ही अलीगढ़ की संस्थाओं से भी बालक के लालन पालन के संबंध में संपर्क किया जाएगा।
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