कासगंज। बेमौसम बारिश ने अन्नदाता किसानों की अरमानों पर पानी फेर दिया। हवा के झोंके गेहूं और जौ की फसल पर भारी पड़े। नतीजा फसल खेतों में ही बिछ गई। कटी पड़ी सरसों की फसल भीगने से खासा नुकसान होने की आशंका है। इसके अलावा आलू, मूंगफली, मटर एवं सब्जियों की फसलें भी बारिश से प्रभावित हुईं। जनपद में करीब सवा लाख हेक्टेयर से अधिक फसलों का रकबा है। जिसमें से 10 प्रतिशत फसल के नष्ट होने का अनुमान है। मौसम के मिजाज ने शुक्रवार को देर सायं अचानक करवट बदली। धीर-धीरे बूंदाबांदी से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रुक रुक कर रात भर चलता रहा। तेज हवा एवं बिजली की कड़कड़ाती आवाज किसानों के दिल दहला रही थी। शनिवार को भी बारिश हुई। दोपहर के समय जब बारिश थमने के बाद हल्की धूप निकली तो किसान ने कुछ राहत महसूस की। इसके बाद वे अपने खेतों में फसल देखने के लिए निकले। फसलों की बर्बादी देख किसानों की आंखों में आंसू छलक पड़े। प्रकृति की इस मार को वे बेबस होकर देखते रहे। इस समय खेतों में गेहूं, जौ, आलू, मटर, मूंगफली की फसलें हैं तो सरसों, लाहा खेतों मे कटी पड़ी है। सब्जियों में टमाटर, पालक, मेथी, धनिया, गोभी, गाजर, मूली सहित अन्य फसलों को खासा नुकसान हुआ है।