रेलवे में तैनात एक इंजीनियर पर फोटो और वीडियो वायरल करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। थाना ताजगंज में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब इंजीनियर ने भी सामने आकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया।
उनका कहना है कि एक एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 13 जनवरी को मारपीट कर पत्नी को घर से निकाल दिया जबकि दूसरी एफआईआर में उसके पिता ने कहा है कि वह विवाद के कारण मायके में रह रही है। यदि उन्हें निकाला था तो पिता की ओर से स्वयं रहने की बात कहना कहानी में बड़े बदलाव को दर्शाता है। 13 जनवरी से पत्नी अपने मायके में है।
यदि वह 4 महीने से दूर है तो उसका फोन प्रार्थी के पास कैसे हो सकता है? 120 दिन तक फोन की कोई गुमशुदगी या चोरी की रिपोर्ट न होना यह सिद्ध करता है कि फोन पत्नी के पास ही था। उनको केवल विभागीय और सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए यह वायरल वाली झूठी कहानी गढ़ी है। वह पुलिस के सामने अपना पक्ष रखेंगे।