आम बजट के साथ पेश किए गए रेल बजट में आगरा मंडल को कोई नई ट्रेन नहीं मिली है। यात्री सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही गई है। पूरे रेल बजट में निजीकरण को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आम यात्री पर बोझ बढ़ेगा। स्टेशनों पर पीपीपी मॉडल पर सुविधाएं बढ़ाने का प्रस्ताव रेल यात्रियों के हित में है। यात्रियों ने निजीकरण से किराया बढ़ने को देखते हुए चिंता जताई।
नई निजी ट्रेन मिलने की उम्मीद
खाली जमीनों पर सौर ऊर्जा के प्लांट लगाने से रेलवे को आर्थिक रूप से फायदा होगा। आगरा में भी काफी खाली जमीनें हैं। 150 निजी ट्रेनों में एक ट्रेन आगरा को मिल सकती है क्योंकि यह महत्वपूर्ण रूट है। निजीकरण से सुविधाएं बढ़ेंगी तो यात्री की जेब भी ढीली होगी।
-राजकुमार शर्मा, सदस्य रेल परामर्शदात्री समिति
आम यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ
रेल बजट में 150 ट्रेनों को पीपीपी मॉडल पर चलाए जाने और निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह उच्च वर्ग के लिए तो ठीक है लेकिन आम यात्रियों के लिए निजी ट्रेनें जेब पर बोझ बढ़ाने वाली होंगी। किराया और उन पर बोझ बढे़गा। -रिंकू अग्रवाल, सदस्य, जेडआरसीसीयू
किराया नहीं बढ़ाना उचित
रेल बजट में किराया नहीं बढ़ाया गया है, यह अच्छा कदम है, लेकिन जिस तरह से निजी ट्रेनों को बढ़ावा देने के लिए रास्ता साफ किया गया है, उससे आम यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा। निजी कंपनियां रेल यात्रियों से ही सुविधाओं का पैसा वसूल करेंगी। -नीतू अग्रवाल, सदस्य, क्षेत्रीय रेल परामर्शदात्री समिति
ट्रेनों में सुरक्षा के उपायों पर विचार नहीं
आगरा से जम्मू, पुणे, इंदौर, कोटा जैसे शहरों के लिए ट्रेनों की संख्या गिनी-चुनी है। रेलवे की खाली जमीनों पर सौर ऊर्जा के प्लांट लगाने का फैसला स्वागत योग्य है। किराया नहीं बढ़ाया गया है मगर ट्रेनों की सुरक्षा, संरक्षा पर बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। आगरा को वंदेभारत ट्रेन मिलनी चाहिए।
-मुकेश वर्मा, पूर्व सदस्य, जेडआरसीसीयू
निजीकरण आम आदमी के हित में नहीं
देश में ज्यादातर लोग निम्न मध्य वर्ग के हैं। ऐसे में निजी ट्रेनें चलाने का फैसला ठीक नहीं है। आगरा में टोरंट का उदाहरण सबके सामने है। निजी कंपनियों को रेलवे जैसे संवेदनशील सेक्टर में ज्यादा हिस्सेदारी नहीं देनी चाहिए। -अर्चना, रेल यात्री
ट्रेनों में महिला सुरक्षा पर ध्यान नहीं
ट्रेनों में अकेले सफर करने में महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। बजट में ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या किया गया है? महिलाओं के कोचों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी, मगर नहीं बढ़ाई गई। महिला कोचों में महिला स्टाफ की नियुक्ति करनी चाहिए। -कुमकुम, रेल यात्री
मेंटिनेंस पर भी ध्यान दिया जाए
स्टेशन पर वाई फाई काम नहीं कर रहा है। एस्केलेटर भी बंद पड़ा है। गेट पर बैगेज स्कैनर बंद पड़ा था। नल में खारा पानी आ रहा है। पहले रेलवे इन सुविधाओं को ही सुचारु कर ले। सुविधाएं दी जाती हैं मगर उनका मेंटिनेंस नहीं किया जाता है। -मंजीत सिंह, रेल यात्री
साधारण कोचों की संख्या बढ़ानी चाहिए
ट्रेनों के जनरल कोचों में खचाखच भीड़ रहती है। इनकी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने के लिए जाने वाले हर वर्ग के परीक्षार्थी को किराये में रियायत देनी चाहिए। ट्रेनों में अकसर रिजर्वेशन नहीं मिल पाता है। -तरुण सिंह, रेल यात्री