हर हरकत पर नजर के लिए घड़ियालों में बांधे जाने वाला ट्रांसमीटर महज 60 ग्राम वजन का है। यह 18×10×8 सेमी. का है। इसकी बैटरी चंबल में ढाई साल तक चलती है और 0.5 से 3 किमी तक की रेंज में इससे घड़ियाल की हरकतों की जानकारी रहती है।
यमुना, चंबल के संगम इटावा के पचनदा तक यह पहुंच चुके हैं। कभी रेड लिस्ट में शामिल रहे शिड्यूल वन के वन्य जीव घड़ियालों की 80 फीसदी संख्या चंबल नदी में पाई जाती है। रेडियो टेलीमेटरी से मिले आंकड़ों से इनके संरक्षण में मदद मिलेगी।
- इस क्षेत्र में दस घड़ियालों को रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर लगाया जा रहा है, जिससे नदी में इनके व्यवहार, ईकोलोजी में बदलाव का अध्ययन किया जा सकेगा। अपस्ट्रीम में यह कितना सफर तय करते हैं, यह भी पता चल सकेगा
आनंद कुमार, डीएफओ, नेशनल चंबल सेंक्चुरी