ताजनगरी में रेडियो के लिए अलग से बाजार बना था। इसका नाम भी रेडियो बाजार रखा गया, जो आज भी है। हालांकि अब यहां रेडियो इक्का-दुक्का दुकानों पर ही मिलते हैं। लगभग सभी दुकानों में टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम मिलते हैं। 30 साल पहले तक यहां 150 दुकानों में सिर्फ रेडियो ही मिला करते थे।
आगरा रेडियो एंड टीवी विक्रेता संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि रेडियो का मार्केट करीब 70 वर्ष पुराना है। उस दौर में रेडियो की बिक्री का यह प्रमुख केंद्र था। आगरा ही नहीं, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, अलीगढ़ से लोग यहां रेडियो खरीदने के लिए आते थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद शाहगंज, शाह मार्केट में रेडियो की दुकानें खुलीं। लेकिन वक्त के साथ सभी जगह रेडियो की दुकानें बंद होती चली गईं।
रेडियो की जगह टीवी ने ले ली। मोबाइल आए तो रेडियो का धंधा और कम हो गया। अब लोग रेडियो मोबाइल में सुन लेते हैं। कारों में स्टीरियो लगे होते हैं, उनसे रेडियो सुना जाता है पर ये रेडियो की दुकानों पर नहीं, कार शोरूम में मिलते हैं। पिछले पांच सालों में नए स्टाइल के रेडियो आए हैं जिन्हें पसंद किया जा रहा है और उपहार में भी दिए जाते हैं।