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UP: गेहूं की बुआई का जानें सही समय, ये हैं अगेती 8 किस्में...खेत के पीले सोने से बरसेंगे हरे-हरे नोट!

Wed, 12 Nov 2025 10:58 AM IST
धीरेन्द्र सिंह देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि गेहूं की उन्नत तकनीकों से उत्पादन तो बढ़े ही जाएगा। इसके साथ ही लागत भी घटेगी।
 
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गेहूं की खेती
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विस्तार
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आरबीएस कॉलेज कृषि संकाय बिचपुरी के शस्य विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजवीर सिंह ने किसानों को रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल गेहूं की पैदावार बढ़ाने के उपाय बताए हैं। उन्होंने गेहूं की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी है।
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प्रो. राजवीर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटती मृदा उर्वरता, खेती की लागत बढ़ना और बढ़ती जनसंख्या के दबाव के बीच खेती को टिकाऊ बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग अनिवार्य है। प्रो. सिंह के मुताबिक, 15 नवंबर से 30 नवंबर तक बुवाई का उचित समय है। यदि किसान समय पर बुवाई, उन्नतशील प्रजातियों का चयन, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई पर ध्यान दें, तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। बुवाई से पहले बीज को थायरम या कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करना चाहिए। इसके साथ ही बीज को हमेशा जैव उर्वरक एनपीके कंसोर्टिया या एजोटोबैक्टर से बीज को उपचारित कर प्रयोग करना चाहिए।

 

वहीं, प्रो. राजवीर सिंह ने कहा कि 10–12 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर बुवाई के 20-25 दिन पहले डालना भूमि की संरचना सुधारने और जीवांश बढ़ाने में सहायक है। कहा कि अगर किसान बुवाई से पूर्व 100 किलोग्राम बीज को 500 मिली नैनो डीएपी से उपचारित करते है, तो फसल का अंकुरण, बृद्धि, विकास और अच्छी उपज पर अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। वहीं, नैनो नाइट्रोजन का प्रयोग दो छिड़काव् के रूप में करने से चार बोरी यूरिया की बचत होती है। साथ ही उत्पादन में भी बढ़त होती है। कहा कि उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए आरबीएस कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं। संवाद


 

उपयुक्त गेहूं की प्रजातियां
प्रदेश की जलवायु के लिए समय पर बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त प्रजातियां डब्ल्यू.एच.-1402, डीबीडब्ल्यू-370, डीबीडब्ल्यू-371, डीबीडब्ल्यू-303, एचडी-2967, एडी-308, डीबीडब्ल्यू-187, डीबीडब्ल्यू-327 हैं। वहीं, देर से बुवाई की स्थिति में एचडी-2851, डब्ल्यूआर-544 पीबीडब्ल्यू-173, पीबीडब्ल्यू-757 आदि प्रजातियां लाभदायक हैं।

 

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
पहली सिंचाई बुवाई के 20–25 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद हर 20–25 दिन के अंतराल पर सिंचाई दें। सामान्यतः चार से पांच सिंचाइयां गेहूं की अच्छी वृद्धि और दाने भरने के लिए पर्याप्त होती हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 30–35 दिन बाद या पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फ्यूरॉन (33 ग्राम प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें। इससे जंगली जई, गेहूं का मामा बथुआ, हिरनखुरी जैसे सकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार प्रभावी रूप से नष्ट होते हैं।

 
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वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी आय
प्रो. राजवीर सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं। इससे खेती की लागत घटेगी, फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण भी संभव होगा। वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने पर न केवल किसान की आय में वृद्धि होगी।
 
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