आगरा। निजी ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित पुस्तक मेले में सरकारी स्कूलों के बजट से किताबें खरीदने के निर्देश पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। साथ ही शिक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है। मामला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. राकेश सिंह की ओर से 8 सितंबर को परिषदीय विद्यालयों के लिए जारी पत्र से जुड़ा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी पत्र में परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पुस्तक मेले का शैक्षणिक भ्रमण कराने और विद्यालय पुस्तकालय के लिए उपलब्ध बजट से उपयोगी व गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। यह राष्ट्रीय पुस्तक मेला 14 सितंबर तक आगरा कॉलेज के सम्प्रू हॉस्टल परिसर में चल रहा है। पत्र के मुताबिक, इस आयोजन में समय इंडिया ट्रस्ट और पुस्तक मेला समिति (रजि.), नई दिल्ली का सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को मेले में होने वाली शैक्षणिक, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित करने को कहा गया है।
विवाद की मुख्य वजह
सरकारी स्कूलों के पुस्तकालय बजट के इस्तेमाल का निर्देश है। जानकारों का तर्क है कि सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए मिलने वाला बजट विद्यार्थियों की अकादमिक जरूरतों के मद्देनजर होता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि पुस्तकालय के लिए किताबों की खरीद को किसी निजी संस्था के सहयोग से चल रहे पुस्तक मेले से जोड़ने की आखिर क्या आवश्यकता आन पड़ी।
इस मेले में विभिन्न निजी प्रकाशकों और लेखकों की किताबें उपलब्ध हैं। सवाल यह भी है कि इन पुस्तकों के चयन का आधार क्या होगा और उनकी गुणवत्ता व कीमत का मूल्यांकन कौन करेगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, बीएसए के पत्र में किसी विशेष प्रकाशक या लेखक की पुस्तक खरीदने का स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन उपलब्ध बजट से मेले के माध्यम से ही पुस्तकें खरीदने की बात जरूर कही गई है।
वर्जन
- विद्यालयों को पुस्तकें खरीदने के लिए किसी तरह की बाध्यता नहीं है। उपलब्ध बजट के अनुसार विद्यालय अपनी आवश्यकता और स्वेच्छा से उपयोगी एवं गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें खरीद सकते हैं। - डॉ. राकेश सिंह, बीएसए