मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की साइकिल ट्रैक योजना शहर में अभी तक धरातल पर नहीं आ सकी है। करीब छह किलोमीटर के ट्रैक में से महज दो स्थानों पर माडल ट्रैक बनाकर छोड़कर दिया है, उस पर साइकिल सवार तो नहीं लेकिन पशु बड़े आराम से चलते हैं। ऐसे में आगरा से चंबल सफारी तक प्रस्तावित ट्रैक के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन लोग इसी में संतोष कर रहे हैं कि साइकिल चले या न चले गांव की पगडंडियां तो पक्की हो जाएंगी।
दरअसल, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर पर्यावरण के लिहाज से साइकिल की सवारी को बढ़ावा देने के लिए ट्रैक निर्माण की योजना बनाई गई थी। लखनऊ में तो ट्रैक बन गया, लेकिन आगरा में अभी तक तैयार नहीं हुआ है। जितने हिस्से में ट्रैक बना है, वहां साइकिल नहीं चलाई जा सकती है। इसके बावजूद पिछले महीने बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन करने आए अखिलेश यादव ने आगरा से चंबल और लाइन सफारी तक ट्रैक बनाने का एलान कर दिया। यह ट्रैक करीब 197.58 किलोमीटर लंबा होगा। आगरा जिले की सीमा में करीब 151 किलोमीटर और इटावा में करीब 46 किलोमीटर लंबा होगा। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 119 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले यह ट्रैक मुख्य सड़क के सहारे नहीं होगा। इसे गांव की पगडंडियों, नहरों की पटरियों से होकर बनाया जाएगा।
कंकरीट से बनने वाले ट्रैक की पगडंडियों पर इसकी चौड़ाई करीब दो मीटर और नहरों की पटरियों पर करीब तीन मीटर होगी। लाइन सफारी तक कई ऐतिहासिक स्थल जैसे राजा भोज की हवेली, नौ गवां का किला, जैन तीर्थ स्थल भी देखने को मिलेंगे। लोगों का मानना है कि इस ट्रैक पर पर्यटक साइकिल चलाएं या न चलाएं लेकिन ग्रामीणों को जरूर सुविधा हो जाएगी। गांव की पगडंडियां और नहर की पटरियां पक्की हो जाएंगी, जिससे उन्हें आवागमन में सुविधा होगी।