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इसे कहते हैं, दीपक तले अंधेरा

Tue, 01 Dec 2015 01:24 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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वह लैब जहां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखी जानी है, उसके भवन निर्माण में भी गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। दीपक तले अंधेरा। यह मुहावरा बमरौली कटारा में निर्माणाधीन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की प्रयोगशाला के मामले में चरितार्थ हो रहा है। खड़े किए जा रहे कालम से ही घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग शुरू हो गया है। आगे कितना गोरखधंधा होगा, समझा जा सकता है।
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अधिकारियों का दावा है कि यह प्रदेश की इकलौती लैब होगी जिसमें खाद्य पदार्थों की जांच की सभी अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। लागत करीब सात करोड़ रुपये आने का अनुमान है। यहां कालम का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
कुछ तैयार भी हो गए हैं। गत दिवस अभिहीत अधिकारी राम नरेश यादव ने साइट का निरीक्षण किया। पाया गया कि मौके पर दो तरह की चंबल सैंड (रेत) रखी हैं। एक की क्वालिटी ठीक है लेकिन बड़ी मात्रा उस सैंड की है जिसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। रामनरेश यादव के मुताबिक इसी खराब सैंड से कालम बनाए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि मौके पर ईंटों का भी ढेर भी लगा है जो किसी भी भवन के निर्माण में प्रयोग लायक नहीं हैं। पूछताछ में मजदूरों ने बताया कि ईंटों का प्रयोग सटरिंग निर्माण में किया जाएगा। अभिहीत अधिकारी ने घटिया निर्माण सामग्री की रिपोर्ट मंडलायुक्त, एफडीए के आयुक्त और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को भेजी है।
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