वहीं गीता की जान खतरे में पड़ गई। उसे इलाज के लिए आगरा ले जाना पड़ा। उन्होंने कमीशन के चक्कर में नवजात की मौत और प्रसूता की जान खतरे में डालने वाले नर्सिंग होम के संचालक, प्रसव कराने वाली झोलाछाप, आशा, स्टाफ नर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में जैतपुर सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मौखिक शिकायत मिली है। मामले की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी।
सील अस्पताल में कैसे हो गया ऑपरेशन
17 मई को बाह के कैंजरा रोड स्थित अस्पताल में 5 माह का भ्रूण ट्रे में रखा मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर ओटी को सील कर दिया था। तब यहां के पंजीकरण के आवेदन को निरस्त किए जाने की बातें कही गई थी। लेकिन प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला भी इसी अस्पताल से जुड़ा हुआ है। इसमें परिजन छोटा ऑपरेशन किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। सील ओटी कैसे खुली? यह सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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टीम भेजकर कराएंगे जांच, दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि सीएचसी पर प्रसव क्यों नहीं हुआ, प्रभारी क्या कर रहे हैं। इसकी जांच कराता हूं। अस्पताल का लाइसेंस है कि नहीं, पहले क्या कार्रवाई हुई। टीम भेजकर पूरी जांच की जाएगी। दोषी स्टाफ और झोलाछाप पर कार्रवाई तय होगी।