ताज महोत्सव के मुक्ताकाशीय मंच पर सोमवार की शाम पंजाबी संगीत के नाम रही। सुप्रसिद्ध पंजाबी गायक और अभिनेता परमीश वर्मा ने अपनी गायकी और स्टाइल से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल जोश और उत्साह से सराबोर होकर भांगड़ा की धुनों पर थिरकता नजर आया।
शाम से ही परमीश को सुनने के लिए युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। रात 9 बजे जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, दर्शक रोमांचित हो गए। आलम यह रहा कि दर्शक दीर्घा खचाखच भर गई। पैर रखने तक की जगह नहीं बची। सैकड़ों युवाओं ने बैरिकेडिंग और पिलर से लटक कर अपने पसंदीदा कलाकार की झलक पाई और संगीत का लुत्फ उठाया। परमीश वर्मा ने एक के बाद एक हिट गाने गाकर युवाओं को झूमने पर विवश कर दिया। भांगड़ा की तेज धुन और उनके सिग्नेचर स्वैग ने माहौल में ऊर्जा भर दी।
पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन संगीत के दीवानों का उत्साह सातवें आसमान पर था। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में ताज महोत्सव के मंच पर केवल पंजाबी धमक ही सुनाई दे रही थी।
इन गीतों ने मचाई धूम
गाल नी कडनी...गाने के बजते ही पूरा ग्राउंड साथ गाने लगा। आरएनएआईटी की बीट्स पर जमकर भंगड़ा हुआ। सब फेड जाणे-मस्ती से भरे इस ट्रैक ने माहौल बना दिया। डायमंड दा कोका...इस गाने पर दर्शकों की डिमांड सबसे ज्यादा रही।