कासगंज। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की हत्या और उन पर हो रहे हमलों की घटनाओं को लेकर हिंदूवादी संगठनों में गहरा आक्रोश है। घटना के विरोध में आज हिंदूवादी संगठनों ने कासगंज में जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट पर धरना देकर तहसीलदार सदर को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई।
हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता सुबह बारहद्वारी पर एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने नगर पालिका तक पैदल जुलूस निकाला। इसके पश्चात, नगर पालिका से कलेक्ट्रेट तक वाहन रैली निकाली गई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और बंगाल में हुई घटनाओं के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष प्रमोद साहू ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी तत्वों को खुली छूट दे रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ कानून के विरोध की आड़ में बंगाल को हिंसा की आग में झोंकने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसमें तीन हिंदुओं की हत्या कर दी गई और कई हिंदुओं के घर व दुकानें जला दी गईं।
विहिप के जिला मंत्री नवीन सक्सेना ने बंगाल की स्थिति को लगातार खराब बताते हुए कहा कि वक्फ कानून सरकार ने लागू किया है, जिसका हिंदुओं से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद बंगाल में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं और वे अपने त्योहार तक शांतिपूर्वक नहीं मना पाते, जिसके लिए उन्हें न्यायालय के आदेश पर अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि बंगाल में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में है और कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बंगाल में हुई हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराई जाए। इसके साथ ही, उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान कर उन्हें देश से निष्कासित करने और बंगाल व बांग्लादेश की सीमा पर तारबंदी करने की भी मांग की। उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की पुरजोर मांग की।
इस दौरान प्रांत धर्मप्रसार सह प्रमुख जगदीश विरथरे, विभाग मंत्री विनय राज पन्नू, बजरंग दल जिला संयोजक दीपक गुप्ता, नगर संयोजक सतेंद्र सिंह, संजय गौड, प्रदीप कावरा, जय प्रकाश गुप्ता, शशांक सारडा सहित कई अन्य हिंदूवादी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।