कासगंज के सहवाजपुर बांध पर मरम्मत के कार्य का जायजा लेते सिंचाई विभाग के अधिकारी
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कासगंज। गंगा में हर साल ही बाढ़ के हालात पैदा होते हैं। बाढ़ की रोकथाम के लिए जिले में गंगा के तटवर्ती इलाकों में मिट्टी के कच्चे बांध बनाए गए हैं। इस जिले में पूर्व के समय में बाढ़ की त्रासदी हो चुकी है। त्रासदी से बचने को न्यौली मनकापुर मुजफ्फरनगर के दस किलोमीटर लंबे बांध को बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। यह प्रस्ताव पिछले 10 वर्षों से शासन में लंबित है, लेकिन अभी तक इसे हरी झंडी नहीं मिली है। जबकि इस बांध की बाढ़ आपदा को रोकने के लिए काफी आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त नरदौली का एक बंधा भी अधूरा पड़ा है।
जिले में गंगा की बाढ़ को रोकने के लिए दतलाना, उढ़ेर, न्यौली, सहवाजपुर मुजफ्फरपुर, समसपुर नरदौली पर बांध बने हुए हैं। इस वर्ष भी इन बंधों पर मरम्मत का कार्य सिंचाई विभाग के द्वारा कराया गया है। पिछले तीन दिनों में इन सभी बांधों पर बाढ़ की आशंका के कारण तेजी से काम किया गया। जहां जहां बांधों में दरारें और कटाव था वहां रेत के पॉलीबैग से इस कटाव को बंद किया गया है और अलग से मिट्टी डाली गई है। बाढ़ आने की स्थिति में बांधों के ऊपर पानी का दबाव बढ़ जाता है। इस कारण बांध कट जाते हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए पुराने बांधों पर पहले से ही काम करा दिया गया है। बमनपुरा के अरविंद, उलाईखेड़ा के राजेश, सत्येंद्र कुमार का कहना है कि न्यौली मनकापुर मुजफ्फरनगर का बांध बनाना जरूरी है।हर बार ग्रामीण मांग करते है लेकिन बार-बार बाध के निर्माण का आश्वासन मिलता है। यदि यह बांध बन जाए तो बाढ़ पर काफी नियंत्रण हो सकेगा।
यह है सिंचाई विभाग का दावा
गंगा की बाढ़ को रोकने के लिए जिले के सभी तटबंधों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह कार्य बाढ़ के अलर्ट से पहले ही कर लिया गया। यदि कटान की समस्या होती है तो सिंचाई विभाग अलर्ट पर है। न्यौली मनकापुर मुजफ्फरनगर के दस किलोमीटर लंबे बांध का प्रस्ताव शासन में लंबित है। यह प्रस्ताव फिर से भी भेजा गया है। करीब बीस करोड़ रुपये लागत का यह प्रस्ताव है। शासन से प्रस्ताव स्वीकृत होगा तभी इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।