हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि कर्बला के मैदानों में पानी भरा हुआ है। इस दौरान मजलिसें भी होती हैं। दो साल के बाद ताजियों का जुलूस भी निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत पाय चौकी के फूलों के ताजिये को उठाने के साथ होती है।
इमामबाड़ों में शुरू होंगी मजलिसें
शाहगंज, लोहामंडी और घटिया आजम खां स्थित इमामबाड़ों में मोहर्रम के आगाज के साथ ही मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही अलम और ताजिये सजाए जाएंगे। शिया समुदाय की ओर से मातम के जुलूस भी निकाले जाते हैं। अंजुमन पंजेतनी के अमीर अहमद एडवोकेट के मुताबिक जुलूस में छुरी, ब्लेड व कमा से मातम किया जाता है।