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आरएसएस की समन्वय बैठकः इन मुद्दों पर सरकार के साथ तो इन पर दिखा विरोध

Sat, 02 Sep 2017 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
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संघ की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी, मोदी सरकार के यह दो ऐसे फैसले थे जिस पर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। समन्वय बैठक में भी नोटबंदी और जीएसटी के प्रभाव के संबंध में चर्चा हुई। प्रचारकों ने कहा कि लोगों को दिक्कत तो हुई, लेकिन जनता सरकार के पक्ष में दिखी। कालाधन रुकने से आम जनता ने राहत की सांस ली थी।
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सभी प्रचारकों ने अपने-अपने क्षेत्र का फीडबैक संघ प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष रखा। नोटबंदी के मुद्दे पर देश भर से पहुंचे प्रचारकों का कहना है कि लोग परेशान तो हुए थे, लेकिन जब कालेधन पर अंकुश लगा तो तसल्ली भी हुई। 

ऐसे में नोटबंदी का कहीं कोई बड़ा विरोध नजर नहीं आया। जीएसटी का भी कोई बड़ा विरोध कहीं नहीं दिखा। हां लोगों को समझने में जरूर दिक्कत हुई। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता स्थिति सामान्य हो गई है। छोटे कारोबार को जरूर नुकसान हुआ है। छोटे कारोबार वाले लोग अभी तक प्रभावित हैं।
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असम-दार्जिलिंग-केरल पर नाराजगी

संघ की बैठक - फोटो : अमर उजाला
संघ के प्रचारकों की केरल में हुई हत्याओं से संघ खफा है। प्रचारकों ने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। वहीं असम और दार्जिलिंग में होने वाली जातीय हिंसा का भी मुद्दा उठाया गया। सरकार से कड़ी कार्रवाई को कहा गया है।

संघ की समन्वय बैठक में असम में हो रही जातीय हिंसा पर नाराजगी जताते हुए यहां प्रचारकों ने कहा कि हजारों लोग इस हिंसा में बेघर हो गए हैं। सरकार ठोस कदम उठाने की बात तो करती है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। 

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने केरल में स्वयं सेवकों की हत्या पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को शीघ्र ठोस कदम उठाना होगा। स्वयं सेवकों ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से समाज में दहशत पैदा होती है। 
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2019 के चुनाव की भी दिखी चिंता

संघ की बैठक - फोटो : अमर उजाला
संघ की समन्वय बैठक में आगामी चुनावों को लेकर कोई खुलकर चर्चा तो नहीं हुई, लेकिन कई मुद्दों पर 2019 के चुनाव की चिंता साफ नजर आती रही। कुछ प्रचारकों ने राममंदिर का मुद्दा भी यहां उठाया।

बैठक में शाम के सत्र में स्वयंसेवकों ने विकास के साथ शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने का भी मुद्दा उठाया। बीच-बीच में आने वाले चुनावों को लेकर भी इशारा होता रहा। प्रचारकों ने कई राज्यों में संगठन की कमजोरियां गिनाते हुए दुरुस्त करने को भी कहा। 

यह भी कहा गया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो स्थिति बिगड़ सकती है। यहां कहा गया कि जनप्रतिनिधियों को भी फील्ड में पूरी ताकत के साथ निकलना होगा। जनता के बीच जाकर उनकी बात सुननी होगी। पब्लिक से जो दूरियां बन रखी हैं उन्हें खत्म करने की जरूरत है।
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