किसान को कॉलर पकड़कर खींचते हुए ले गए प्रभारी निरीक्षक
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मैनपुरी के किशनी क्षेत्र में पराली जलाने पर किसानों को जेल भेजे जाने पर विपक्षी दलों ने सख्त रुख अपनाया है। एक ओर जहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर इसे गलत बताया है तो वहीं सपा के पूर्व सांसद तेजप्रताप यादव ने कहा कि किसान इसका बदला लेंगे।
गुरुवार को किशनी क्षेत्र में पराली जलाने पर पांच किसानों को एसडीएम किशनी रामसकल मौर्य ने जेल भेज दिया था। मामले में एक फोटो भी तेजी से वायरल हुआ। इसमें प्रभारी निरीक्षक किशनी एक किसान को कॉलर पकड़कर ले जा रहे थे। मामले को विपक्ष ने आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसी फोटो के साथ किए गए ट्वीट में कहा है कि किसान का वोट कानून और पराली गैर कानूनी। उन्होंने ये भी कहा है कि आखिर असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी।
वहीं दूसरी ओर सपा के पूर्व सांसद और मुलायम सिंह के पौत्र तेजप्रताप यादव ने भी ट्वीट कर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने लिखा है कि किसानों को जेल में डालने वाली भाजपा सरकार को सबक सिखाने के लिए किसान तैयार हैं। जल्द ही बिहार इसका उदाहरण पेश करेगा और फिर समूचा देश।
प्रियंका गांधी
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मामला बढ़ा तो एसडीएम ने दी सफाई
किशनी में पांच किसानों को पराली जलाने पर जेल भेजे जाने का मामला बढ़ा तो एसडीएम किशनी रामसकल मौर्य ने सफाई दी। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि निरीक्षण के दौरान पराली जलाने के मामले सामने आए थे। किसानों ने इस दौरान विवाद किया, इसके चलते उन पर पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि गुरुवार को उन्होंने विवाद जैसी कोई बात नहीं बताई थी।
पराली जलाने पर 14 किसानों के खिलाफ तहरीर
पराली जलाने के मामले में लगातार कार्रवाई के बाद भी घटनाएं सामने आ रही हैं। शुक्रवार को किशनी क्षेत्र में अलग-अलग गांवों में पराली जलाने के 14 मामले संज्ञान में आए। इसमें गांव हिंदूपुर, नगला कोठी, ढढौस और नगला दूबर के किसान शामिल हैं। मामले में कृषि विभाग के एडीओ नरेश ङ्क्षसह ने थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए 14 किसानों के खिलाफ तहरीर दी है।
एफआईआर वापस नहीं हुई तो होगा धरना
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष शिवाकांत दुबे ने शुक्रवार को उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि प्रथम बार पराली जलाने पर जुर्माना किए जाने और एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। इसके बाद भी किशनी में पांच किसानों को जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर सात नवंबर तक मुकदमे वापस न हुए तो किसान यूनियन कलक्ट्रेट में धरना देगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।