भर्ती करने के समय एक लाख रुपये की मांग
प्रदेश सरकार की तय दर के उलट निजी अस्पतालों ने आगरा में दिल्ली के मल्टीस्पेशियेलिटी अस्पतालों से ज्यादा बिल वसूला। हाईवे स्थित अस्पताल ने मरीज भर्ती करने से पहले ही एक लाख रुपये वसूले, जबकि हर दिन 40 से 60 हजार रुपये का बिल बनाया गया। इसमें रेमडिसिविर इंजेक्शन का खर्च शामिल नहीं है। कोरोना संक्रमण में अस्पतालों को मनमाने बिल देने के बाद भी अपने परिजनों को न बचा सके लोग अब अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री को मेयर सौंपेंगे अस्पतालों की लूट का चिट्ठा
मेयर नवीन जैन के पास हर दिन निजी अस्पतालों में मनमाने बिल और लूट खसोट की शिकायतें पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उन्होंने निजी अस्पतालों के रेट की शिकायतें की थीं। मेयर नवीन जैन ने लोगों से कहा है कि वह निजी अस्पतालों में सरकार की ओर से तय दर से ज्यादा वसूली की शिकायतें करें। वह इन शिकायतों को मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। ऐसे अस्पताल प्रदेश सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। उनके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। सरकार ने जो दर तय की हैं, उससे कई गुना ज्यादा तक वसूली की जा रही है।
मजिस्ट्रेट से कराएंगे शिकायतों की जांच
जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कहा कि सभी कोविड व नॉन कोविड अस्पतालों में शासनादेश में तय इलाज खर्च ही मरीजों से लिया जाएगा। अब तक तीन शिकायतें मिलीं जिनमें दो गलत, एक सही पाई गई, जिस पर डिबार करने की कार्रवाई की गई है। सीएमओ टीम व मजिस्ट्रेट से मनमाने रेट वसूलने की शिकायतों पर दोनों पक्षों की जांच कराएंगे। अवैध बिलिंग पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।