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जेल में बंदी की मौत का मामला: बेटे का आरोप- मेरे पिता चोर नहीं थे, पुलिस ने गलत फंसाया

Sat, 07 Dec 2019 12:26 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
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जिला कारागार आगरा
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आगरा जिला कारागार में मथुरा के बल्देव गौतम (45) की मौत के मामले में पुलिस और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बेटे सचिन गौतम ने थाना हरीपर्वत में तहरीर देकर पिता की हत्या की बात कही है। ई एफआईआर भी दर्ज करा दी है। उधर, जेल प्रशासन पूरे प्रकरण की जांच करा रहा है। शुक्रवार को बंदियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।
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मथुरा के थाना बल्देव स्थित बल्टीगढ़ी निवासी बल्देव पुत्र पातीराम को थाना खंदौली पुलिस ने 25 नवंबर को गांव उजरई में एक दुकान का ताला काटते हुए पकड़ा था। उसे चोरी के प्रयास के आरोप में जेल भेजा था। 

बृहस्पतिवार दोपहर को बंदी का शव बैरक नंबर नौ के अहाते में बने शौचालय के छज्जे से गमछा डालकर बनाए गए फांसी के फंदे पर लटका मिला था। जेल अधीक्षक शशिकांत मिश्र का कहना था कि बंदी ने आत्महत्या की है। उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला।
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नेवी में है मृतक का बेटा

बल्देव के बेटा सचिन इंडियन नेवी में विशाखापट्टनम में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि पिता चीनी के थोक विक्रेता थे। हाथरस और मथुरा में चीनी की सप्लाई करते थे। नौ दिन पूर्व खंदौली पुलिस ने उनके पिता को चोर बताकर जेल भेज दिया था, जबकि वो चोर नहीं थे। 

जेल में शव दोपहर तकरीबन 1:20 बजे फांसी पर लटका मिलना बताया गया, जबकि परिवार को सूचना 4:30 बजे दी गई। सचिन रात आठ बजे पहुंच पाए थे। तब तक शव पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचाया जा चुका था। 

मृतक के बेटे ने कहा कि घटना के बाद जेल प्रशासन की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया। रात में ही पोस्टमार्टम करा दिया गया। सुसाइड नोट तक नहीं दिखाया गया। पुलिस तहरीर दिए जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। 

इस पर ई एफआईआर दर्ज कराई है। जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए सचिन ने कहा कि उनके पिता की हत्या की गई है। वह इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे। थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने तहरीर मिलने से इंकार किया।
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कहां थे बंदीरक्षक 

जेल में बंदियों को देखने के लिए बंदीरक्षक तैनात रहते हैं। इसके अलावा बंदी भी रहते हैं। बल्देव फांसी पर लटक गया, लेकिन अन्य बंदियों को पता भी नहीं चला। अधीक्षक शशिकांत मिश्र ने बताया कि वार्डन, बंदीरक्षक, बंदी और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बेटे के ये हैं सवाल
- फांसी लगाई तो किसी अन्य बंदी को पता क्यों नहीं चला?
- जेल के बंदीरक्षक कहां थे? उनके बयान दर्ज किए जाएं?
- तीन घंटे बाद घटना की जानकारी दी गई? ऐसा क्यों?
- जेल प्रशासन ने परिजनों से बात क्यों नहीं की?
- पुलिस और जेल कर्मियों ने पोस्टमार्टम कराने में जल्दबाजी क्यों की?
- सुसाइड नोट नहीं दिखाया गया? परिजनों के आने से पहले सील क्यों किया?
- दुकान में चोरी का प्रयास क्यों करेंगे? परिवार में किसी तरह की परेशानी नहीं है।
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