भोगांव। मैनपुरी रोड स्थित काल्पनिक बनारस नगरी में आयोजित तपकल्याणक उत्सव की शुरूआत सोमवार की सुबह जलाभिषेक और पूजन के साथ हुई। पंडित अभय कुमार शास्त्री ने कहा, राज्यसभा में पिता अश्वसेन के साथ बैठे राजकुमार पार्श्वनाथ को भेंट देने के लिए जैसे ही अयोध्या नरेश का राजदूत आया तो उन्हें अपने पूर्व के दस जन्मों का ज्ञान अनायास ही हो गया। ये विचार मन में आते ही राजकुमार को वैराग्य हो गया और उन्होंने दिगम्बरी दीक्षा अंगीकार करने का ऐलान कर दिया। जैसे ही राजकुमार पार्श्वनाथ के मन में वैराग्य की धारा उमड़ी तो तुरंत ही स्वर्ग से लौकांतिक देवों का आगमन हुआ और देवों ने उनका सम्मान किया। दीक्षावन में दीक्षा विधि के दौरान पंडित अभय कुमार शास्त्री ने कहा कि राजपाट और भौतिक सुखों को छोड़कर राजकुमार ने धर्म का मार्ग चुना है। उन्होंने संसार की ओर से मुख मोड़कर दिगम्बरत्व को स्वीकार किया है। पार्श्वनाथ के इस कदम से बनारस नगरी के वासी भी समझ गए हैं कि सच्चा सुख पाने के लिए धर्म का मार्ग ही सच्चा मार्ग है। इस दौरान शैंकी जैन, समिति अध्यक्ष राकेश कुमार जैन, आशीष जैन आशू , वैभव जैन, अम्बुज जैन, कुमुद जैन, सौरभ जैन आदि मौजूद रहे।