आगरा में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना (पीएम स्वनिधि) का 19 महीने में पूरा गणित बदल गया। योजना जहां से लांच हुई वहीं दम तोड़ रही है। 27 अक्तूबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने ताजगंज निवासी फल विक्रेता प्रीति से संवाद के साथ इस योजना को लांच किया था। तब लाभार्थियों के पंजीकरण में वाराणसी को पछाड़कर आगरा प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। पर, अब लक्ष्य घट गया, ज्यादा संख्या में आवेदन निरस्त हुए और महज 35 हजार को ही ऋण का लाभ मिल सका है।
डूडा के परियोजना निदेशक मुनीश राज ने बताया कि जब योजना शुरू हुई तब बहुत से लोग बेरोजगार थे। जूता कारीगर, रिक्शा चालक व अन्य कारीगर व पेशे से जुड़े लोगों ने पथ विक्रेता के लिए ऋण लेने का पंजीकरण कराया था। भौतिक सत्यापन में वे लोग नहीं मिले। फार्म भी अधूरे भरे गए। जांच में पता चला कि वह लोग पुराने काम पर लौट गए। ऐसे 38 हजार आवेदन निरस्त हो गए। इसके बाद अब 41 हजार लक्ष्य है। 35 हजार ऋण बांट चुके हैं।
अक्तूबर 2020 तक जिले में 53,442 लाभार्थी पंजीकरण करा चुके थे। इनके सापेक्ष 24,290 लोगों को ऋण वितरण हुआ। महज 14 हजार लोगों ने ही किस्त चुकाई। करीब 10 हजार लोग तब डिफॉल्टर हुए थे। इसके बाद से योजना में ऋण स्वीकृति पर ब्रेक लग गया। यही वजह है कि अक्तूबर 2020 के बाद 19 महीने में 11 हजार लोगों को ही ऋण मिल सका। जिले में कुल 35 हजार लाभार्थियों को ऋण मिला है।
बिना गारंटी दस हजार रुपये ऋण योजना में 24 प्रतिशत ब्याज थी। 10 किस्तों में 10 हजार रुपये का कुल 11,349 रुपये चुकाना था। इसमें 402 रुपये की लाभार्थी को सब्सिडी मिलती और 1200 रुपये का कैशबैक प्रोत्साहन था। इस तरह पूरा पैसा चुकाने पर लाभार्थी को 1602 रुपये का लाभ होता।