टूंडला स्टेशन पर प्रेसिडेंशियल ट्रेन के आने से पहले हुआ ट्रॉयल
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शुक्रवार को दिल्ली से कानपुर जाने वाली प्रेसिडेंशियल एक्सप्रेस की सुरक्षा का गुरुवार को ट्रायल किया गया। टूंडला से लेकर जनपद के आखिरी स्टेशन भदान तक सिविल पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ अधिकारी भी ट्रायल में शामिल हुए। इस दौरान एसएसपी ने सभी को ब्रीफ किया।
बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को दिल्ली से अपने गृह जनपद कानपुर की यात्रा करेंगे। गुरुवार को प्रेसिडेंशियल एक्सप्रेस की सुरक्षा का ट्रायल हुआ। इसके लिए दिल्ली से लखनऊ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस को प्रेसिडेंशियल एक्सप्रेस माना गया। डीएम चंद्र विजय सिंह, एसएसपी अशोक कुमार शुक्ला, डीटीएम के साथ टूंडला स्टेशन पर पहुंचे। वहीं ट्रेन के टूंडला आने से पहले ही फोर्स को निर्धारित स्थलों पर तैनात किया गया। ट्रेन के भदान स्टेशन से गुजरने के बाद ड्यूटियां वापस की गईं। एसएसपी ने बताया कि सुरक्षा का रिहर्सल करने में कहीं कोई परेशानी नहीं आई।
अब तक ये राष्ट्रपति कर चुके हैं सफर
अभी तक 87 बार महाराजा स्पेशल ट्रेन का प्रयोग किया जा चुका है। सबसे पहले इस ट्रेन में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1950 में सफर किया था। वे इस ट्रेन से दिल्ली से कुरुक्षेत्र तक गए थे। उनके बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वर्ष 1977 में और डॉ. नीलम संजीवा रेड्डी ने भी इस ट्रेन से यात्रा की। इसके 26 साल बाद 30 मई 2003 को राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने बिहार तक इस ट्रेन में सफर किया था। तब से 18 वर्ष बीतने के बाद भी यह स्पेशल ट्रेन दिल्ली में ही खड़ी रही।
अब 25 जून 2021 को देश की आजादी के बाद पहली बार यह सैलून दिल्ली-कानपुर रेलखंड पर दौड़ेगा। इस सैलून में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मौजूद रहेंगे। टूंडला के लिए यह दिन और भी खास इसलिए हो जाता है क्योंकि पहली बार ही ऐसा हो रहा है कि आजादी के बाद कोई राष्ट्रपति टूंडला से होकर गुजरेंगे। उनके इस आगमन के लिए खास व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
दो कोचों की है प्रेसिडेंसिल स्पेशल ट्रेन
रेल अधिकारियों के अनुसार यूं तो यह स्पेशल ट्रेन दो कोच की है जिसका नंबर 9000 और 9001 है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अन्य कोच जोड़े जा सकते हैं। ये दोनों कोच पूर्ण सुविधाओं से लैस हैं, इसलिए इसे प्रेसिडेंशियल ट्रेन भी कहा जाता है।
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