निपाह के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट भले ही जारी कर दिया हो, लेकिन तैयारियां चौपट हाल में हैं। यहां संभावित मरीज का नमूना लेने के लिए डॉक्टरों के पास सेल्फ प्रोटेक्शन किट उपलब्ध नहीं है।
एसएन मेडिकल और जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड तक तैयार नहीं किए गए। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कागजों पर ही अलर्ट है। केरल में निपाह से मौत होने के बाद गाजियाबाद में भी संदिग्ध मरीज मिलने की सूचना है।
यहां ताजमहल होने के चलते केरल सहित देश-विदेश से तमाम पर्यटक आते हैं। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है, लेकिन इंतजाम कुछ भी नहीं है।
निपाह का वायरस बायोसेफ्टी लेवल फोर (बीएसएल-4) में आता है। इसका वायरस स्वाइन-बर्ड फ्लू के वायरस से भी खतरनाक है।ऐसे में इसके नमूने लेने के लिए डॉक्टरों को विशेष सेल्फ प्रोटेक्शन किट की जरूरत रहती है।
ये स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं और नहीं इनके पास एम-95 मास्क भी हैं। संभावित मरीज कहां रखा जाएगा, इसके लिए आइसोलेशन वार्ड भी नहीं बनाए गए हैं।
ताजमहल पर केरल से सैकड़ों पर्यटक रोजाना आते हैं। ऐसे में यहां भी स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मरीजों के लिए कोई स्पेशल टीम नहीं लगाई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज, ईएसआई, प्राइवेट हॉस्पिटल और लैब को सिर्फ कागजी निर्देश जारी कर तैयारियां कर ली हैं। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि प्रोटेक्शन किट अभी नहीं आई हैं। सरकार को लिखा जा चुका है। बाकी की तैयारियां कराई जा रही हैं।
संक्रमित सूअर, चमगादड़ से है फैलता
निपाह वायरस से संक्रमित सूअर, चमगादड़ के संपर्क में आने से हो सकता है। इससे सबसे ज्यादा खतरा सूअर पालक को है। संक्रमित मरीज के संपर्क में आने से दूसरों में फैलता है।
लक्षण की बात करें तो इसमें भी मरीज को तेज बुखार आता है। सिर और पैरों में दर्द रहता है। एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने कहा कि निपाह वायरस से संक्रमित होने पर मरीज में तीन से 14 दिन में लक्षण नजर आने लगते हैं।