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तैयारी: कांवड़ मेले के लिए सज रहा सोरोंजी का बाजार

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सोरोंजी। तीर्थनगरी में सावन मास का वार्षिक कांवड़ मेला 21 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होगा। मेला के लिए सोरोंजी का बाजार सजने लगा है। 19 अगस्त श्रावण पूर्णिमा तक चलने वाले इस मेले के लिए दुकानदारों ने जगह किराए पर लेकर दुकानें लगाना शुरू कर दिया है। श्रद्धालुओं को यहां अपनी आवश्यकता एवं जरूरत का सभी सामान मिल सकेगा।तीर्थनगरी के लहरा घाट, कासगंज गेट, होडलपुर में राजमार्ग किनारे प्रतिवर्ष कांवड़ मेला की दुकानें सजती हैं। इस मेले में जनपद के अलावा निकटवर्ती एटा, बदायूं के दुकानदार अपनी दुकानें लगाते हैं। मेले में एक हजार से अधिक दुकानें लगती हैं। जिन पर कांवड़ और उसे सजाने का सामान, कपड़े, बेंत, घुंघरू, घंटी, गंगाजली आदि सामान की बिक्री होती है। पालिका प्रशासन द्वारा इस बार भी कांवड़ियां-श्रद्धालुओं के लिए लहरा घाट मार्ग पर प्रकाश, पेयजल, अस्थायी प्रसाधन गृह का इंतजाम किया जा रहा है।लहरा घाट पर अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती मेला पर्यंत रहेगी। पुलिस व यातायात विभाग द्वारा भी राजमार्ग पर एक लेन वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर सिर्फ कांवड़ियों के प्रस्थान के लिए होने की योजना अमल में लाई जाएगी। गंगा घाटों पर स्वास्थ्य कैंप लगाने, पार्किंग स्थल, गोताखोरों की तैनाती की योजना तैयार की गई है। तीर्थनगरी के होडलपुर के कांवड़ की कंडिया बनाने वाले और कादरबाड़ी में कांच की गंगाजली बनाने वाले कारीगर मेटाडोर द्वारा तैयार सामान राजघाट में लगने वाले कांवड़ मेले में भेज रहे हैं। वहीं कछला, अनूपशहर, ढाई घाट, नरौरा आदि स्थानों के व्यापारी भी अपने यहां लगने वाले कांवड़ मेले के लिए तीर्थनगरी के थोक विक्रेताओं से सामान खरीदकर ले जा रहे हैं। थोक विक्रेताओं के यहां शिकारपुर से कांच की तस्वीरें, मुरादाबाद से गंगाजली, दिल्ली से सजावटी सामान, पुरदिल नगर से मोती की मालाएं, कोलकाता से बेंत,जलेसर से घुंघरू घंटी, बनारस, दिल्ली, मथुरा आदि स्थानों से प्रतिदिन ट्रांसपोर्ट से मेला से संबंधित माल आ रहा है।
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इस बार सावन मास में रहेंगे पांच सोमवार : पहला सोमवार 22 जुलाई, दूसरा 29 जुलाई, तीसरा 5 अगस्त, चौथा 12 अगस्त, अंतिम पांचवां सोमवार 19 अगस्त को रक्षा बंधन वाले दिन पड़ेगा। मान्यता के अनुसार, कांवड़िया सोरों जी से गंगाजल ले जाकर सावन के सोमवार को ही शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
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