पिनाहट ब्लॉक की प्रमुख ऊषा देवी का बेटा गजेंद्र सिर्फ 17 साल की उम्र में चचिहा गांव का प्रधान बन गया है। जबकि कानून के मुताबिक, नाबालिग को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। लेकिन वह इसलिए मैदान में उतर पाया क्योंकि उसने शपथपत्र में झूठ बोला। सिर्फ उम्र ही नहीं छुपाई, पढ़ाई-लिखाई की भी गलत जानकारी दी। 11वीं का छात्र होते हुए खुद को पांचवीं पास बताया। उस पर यह सारे आरोप लगाते हुए डीएम से बुधवार को शिकायत की गई है।
इस चुनाव में पराजित प्रत्याशी राम गोपाल ने शिकायत के साथ उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट भी डीएम आफिस को मुहैया कराई है। इसके अनुसार, उसने यूपी बोर्ड से दसवीं 2015 में उत्तीर्ण की। इसके बाद दुर्गापाल सिंह इंटर कॉलेज, पिनाहट में 11वीं में दाखिला लिया। वह अभी भी इसी विद्यालय का छात्र है।
लेकिन नामांकन के साथ दिए गए शपथपत्र में उसने शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में खुद को प्राइमरी तक पढ़ा-लिखा यानी पांचवीं पास बताया है। वोटर लिस्ट के अनुसार, अपनी उम्र 21 साल बताई है। राम गोपाल का कहना है कि वोटर लिस्ट में उसका नाम चुनाव से ऐन पहले दर्ज कराया गया था। उसके झूठ पकड़े जाने पर पर्चा निरस्त हो जाने का डर था, इसलिए उसके परिवार से चार सदस्यों ने नामांकन किया था। उसका पर्चा निरस्त नहीं हुआ तो शेष तीन ने नाम वापस ले लिया।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट चचिहा से कुल नौ उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। गजेंद्र को 694 वोट मिले। पूरन सिंह को 437 वोट प्राप्त हुए थे। गजेंद्र सिंह के पिता राम सनेही कौशल बसपा के नेता हैं।
अब प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार नहीं : एडीएम
एडीएम प्रशासन हरनाम सिंह का कहना है कि चुनाव में जीत का प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद प्रशासन या निर्वाचन आयोग के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अगर, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान शिकायत आती है और सही पाई जाती है तो झूठा शपथ पत्र देने वाले के खिलाफ केस दर्ज कराया जाता है। चुनाव के बाद सिर्फ कोर्ट जाने का रास्ता रह जाता है।
चुनाव में क्यों नहीं की शिकायत : राम सनेही
राम सनेही यह बताने के लिए तैयार नहीं हैं कि उनका बेटा गजेंद्र हाईस्कूल पास है या पांचवीं पास। वे सिर्फ इतना जवाब दे रहे हैं कि अगर किसी को कोई शिकायत थी तो चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान करनी चाहिए थी। अब शिकायत करने का क्या मतलब है? उसकी उम्र वोटर लिस्ट, वोटर कार्ड, आधार कार्ड सभी में 21 साल है।