यमुना किनारे पेड़। इनसेट- प्रदीप बंसल
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मथुरा में यमुना के तटों को जहरीला बना रहा है सीवर का रसायनयुक्त पानी। इससे आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण हो रहा है। इसी प्रदूषण रूपी राक्षस से लड़ रहे हैं प्रदीप बंसल। उन्होंने यमुना के किनारों पर अभी तक नौ किलोमीटर के दायरे में सवा लाख पौधे रोप दिए हैं। उनकी इस मुहिम से यमुना के किनारे ग्रीन बेल्ट बन गई है।
यमुना की जो मान्यता मथुरा में है, वह कहीं अन्य नहीं है। यमुना का धार्मिक महत्व मथुरा में ही है, लेकिन, इसकी स्थिति किसी से छुपी नहीं है। सरकारी प्रयास के बाद भी तमाम गंदे नाले सीवर और रसायनयुक्त पानी के साथ सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इससे यमुना को बचाने के लिए चले कई अभियानों से प्रेरित
समाजसेवी प्रदीप बंसल ने यमुना को मिशन बनाकर गऊघाट से पौधरोपण की शुरुआत की।
तीन साल पहले मथुरा से वृंदावन की ओर यमुना किनारे खादर की जमीन पर अब तक 1.25 लाख पौधे रोपे गए हैं। स्वामीघाट से अक्रूर मंदिर तक करीब सात किलोमीटर के दायरे में नीम, बरगद, कदंब, पीपल, अर्जुन के पौधे लगाए हैं, जो अब वृक्ष बनते नजर आ रहे हैं। इस दायरे में मसानी सहित 10 नालों का बहाव यमुना में गिरने से रोकते हुए गंदा पानी इन वृक्षों के बीच में ही खप रहा है।
अब यह अभियान यमुना किनारे ध्रुवघाट से सदर की ओर बढ़ गया है। प्रदीप बंसल बताते हैं कि यमुना मिशन एक टीम वर्क है, जिससे प्रमुख रूप से अनिल शर्मा सहित करीब 2500 सदस्य जुड़े हुए हैं। कोशिश है कि इस धार्मिक क्षेत्र में बहती यमुना के किनारे को हरियाली से ढक दिया जाए।