आलू बोआई का समय नजदीक है। किसानों को अगली फसल में लागत की चिंता सताने लगी है। शहर में देश और प्रदेश भर के व्यापारियों का मेला लगने के बाद भी भाव तो दूर निकासी तक में वृद्धि नहीं हुई है। उत्पादन का आधे से ज्यादा आलू शीतगृहों में रखा है।
बीती 12-13 सितंबर को शहर के पांच सितारा होटल में उद्यान विभाग ने आलू की सौ फीसदी निकासी और अच्छे भाव में बिक्री की रूपरेखा तैयार करने के लिए सम्मेलन किया। इसमें देशभर से आलू व्यापारियों को बुलाया था। 31 जिलों के किसान और उद्यान अधिकारी आए। इससे जिले के किसानों को उम्मीद बंधी थी कि आलू के अच्छे भाव मिलने के साथ समय से बिक्री भी हो जाएगी। मगर पूरा सम्मेलन मात्र 8 सौदों में निपट गया।
अभी भी 55 फीसदी से अधिक आलू कोल्ड स्टोरों में जमा है। जिले अगले महीने 15 अक्टूबर से अधिकतम किसान की बोआई शुरू हो जाएगी। किसानों को उर्वरक, जोताई, बीज, लेबर सहित अन्य लागत के लिए रुपये की जरूरत है। पिछली फसल न बिकने से समस्या खड़ी हो रही है। इससे आलू का रकबा कम होने की आशंका है। बता दें जिले में 332 कोल्ड स्टोरेज हैं। इनमें 30.41 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित हुआ था। इसमें से अभी करीब 45 फीसदी की आलू निकासी ही हो सकी है। हर हालत में 30 नवंबर तक आलू निकालना होगा।