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यूपी में आलू किसान बेहाल, टाल दी बेटियों की शादी

Thu, 26 Oct 2017 08:27 AM IST
पुनीत शर्मा/अमर उजाला मथुरा
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potato - फोटो : getty images
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उत्तर प्रदेश में आलू किसान बेहाल हैं। लागत तो क्या निकलती कोल्ड स्टोर का भाड़ा भी अपनी जेब से दे रहे हैं। जिन किसानों ने आलू बेचकर बेटी के हाथ पीले करने का सपना संजो रखा था वह भी टूट गया है। मजबूर पिता ने अब बेटी की शादी आगे बढ़ा दी है। जबकि कुछ कर्ज लेकर बेटी की शादी करने की तैयारी कर रहे हैं।
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उत्तरप्रदेश में अगर आलू उत्पादक जिलों की बात करें तो आगरा, मथुरा, फर्रुखाबाद, अलीगढ़, कानपुर, फिरोजाबाद, बरेली, अमरोहा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बदायूं प्रमुख रूप से हैं। मथुरा जिले में ही 20 हजार हेक्टेयर में आलू की पैदावार हो रही है। 

लेकिन पिछले दो साल से आलू का भाव न मिल पाने के कारण किसान बेहाल हैं। तमाम किसानों ने यह सोचकर पूंजी लगाई थी कि आलू की अच्छी फसल होगी तो बेटी की शादी कर देंगे। लेकिन भाव न मिल पाने के कारण शादी टाल दी है। 
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farmer - फोटो : demo pic
खखा गांव निवासी विक्रम सिंह ने 50 बीघा खेत में आलू लगाया था। आलू की फसल भी अच्छी हुई। लेकिन भाव नहीं मिला। आलू कोल्ड स्टोर में रखा है। 28 नवंबर को बेटी की शादी अलीगढ़ से तय की थी लेकिन अब आगे टाल दी है। कहते हैं कि किसान के पास तो गेहूं, धान या फिर आलू की पूंजी है जिसे बेचकर जिम्मेदारियां पूरी की जाती हैं। 

सुघरिया राया निवासी किसान रामबाबू ने 15 बीघा खेत में आलू लगाया था। लेकिन अब तो भाव ही नहीं मिल पा रहा है। कोल्ड स्टोर में आलू रखा है। 23 नवंबर को बेटी की शादी थी लेकिन अब अगले साल के लिए टाल दी है। 

फिंक रहा आलू

नगला भीमा गांव के आलू किसान योगेश शर्मा ने 16 बीघा में आलू की फसल की थी। सोचा था कि इस साल अपनी बड़ी बेटी की शादी कर देंगे। लेकिन आलू की ऐसी बेकदरी हुई कि मंडी में भी मारा मारा फिर रहा है। 

फरह क्षेत्र के गांव नगला दोजी निवासी सुरेश चंद्र कहते हैं कि आलू चार रुपये किलो बिक रहा है। अब किसान कहां जाए आलू लेकर। आलू फिंक रहा है। वह भी इस साल बेटी की शादी की तैयारी में थे लेकिन अब अगले साल के लिए टाल दी है।  

थोक में 2 से 3 रुपये कीमत

मंडी समिति में 50 किलो आलू का बोरा 100 रुपये तक में बिक रहा है। किसान अपने गांव से ट्रैक्टर में लादकर जो आलू लेकर जा रहे हैं उसका किराया तक नहीं निकल पा रहा। कई बार तो जब शाम तक आलू नहीं बिकता तो किसान मंडी समिति में ही उसे फेंककर चले आते हैं। 

जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार का कहना है कि पहले आलू की खेती बड़े पैमाने पर यूपी में ही होती थी लेकिन अब हर राज्य में हो रही है। आलू का भाव कम होने की एक बड़ी वजह यह भी है। 

हालांकि सरकार ने आलू के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की है। आलू के निर्यात के लिए कुल भाड़े का पच्चीस प्रतिशत सरकार दे रही है। इस योजना के बाद आलू का निर्यात बढ़ा है।
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कर्ज लेकर करेंगे बेटी के हाथ पीले

सुथरिया गांव निवासी श्रीमती देवी ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कहा है कि उन्होंने राया कृषि फार्म से धान का बीज लेकर रोपाई की थी लेकिन धान की खेती हुई ही नहीं। बाली निकलते ही धान चौपट हो गया है।

हमने सोचा था कि धान बेचकर बेटी की शादी करेंगे लेकिन धान की बर्बादी ने उनका सपना भी धूमिल कर दिया है। उन्होंने कृषि अधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि 23 नवंबर को बेटी की शादी है। अब शादी के लिए कर्ज ले रहे हैं। उन्होंने फसल की जांच कराने की मांग की है। 
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